प्रयागराज महाकुम्भ के दौरान आयोजित नेत्रकुम्भ: श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम

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नेत्र महाकुंभ में एक मरीज की आंखों की जांच करते डॉ सुरेश पाण्डेय
सन्दर्भ: प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रयागराज महाकुम्भ में आयोजित नेत्रकुम्भ में दो लाख से अधिक नेत्र रोगियों को निःशुल्क परामर्श हेतु की सराहना

-डॉ सुरेश पाण्डेय-

dr suresh pandey
डॉ. सुरेश पाण्डेय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बागेश्वर धाम में 23 फरवरी को कैंसर अस्पताल के भूमि पूजन समारोह में प्रयागराज महाकुम्भ के दौरान ऑल इंडिया ऑप्थाल्मोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा आयोजित नेत्रकुम्भ का उल्लेख किया, जिसमें दो लाख से अधिक नेत्र रोगियों को निःशुल्क परामर्श मिला। इस पवित्र सेवा में डेढ़ लाख से अधिक मरीजों को निःशुल्क नेत्र दवाईयां एवं चश्मे दिए गए, और चित्रकूट एवं अन्य नेत्र चिकित्सालयों में 16,000 से अधिक नेत्र रोगियों के मोतियाबिंद सर्जरी व कृत्रिम लेंस प्रत्यारोपण पूर्णत: नि:शुल्क किए गए। प्रयागराज महाकुम्भ में इस नेत्र कुम्भ नामक इस सेवा कार्य को अंजाम दिया गया। देश के विभिन्न कोनों से आए नेत्र विशेषज्ञों ने दो माह से जारी नेत्र कुम्भ में निःशुल्क व निःस्वार्थ सेवा दी। स्वयं प्रधानमंत्री ने इन नेत्र चिकित्सकों की सेवा भावना की सराहना की। मुझे भी प्रयागराज महाकुम्भ के दौरान नेत्रकुम्भ में भाग लेने का सौभाग्य मिला और इस दौरान मैंने अन्य नेत्र चिकित्सकों के साथ मिलकर अनेकों नेत्र रोगियों की जाँच कर उन्हें निःशुल्क दवा और परामर्श प्रदान किया।

महाकुम्भ न केवल आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए भी एक अद्भुत अवसर प्रदान करता है। जिस प्रकार प्रयागराज पहुंचे लाखों रोगियों तक नेत्र स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाईं, उसी प्रकार आध्यात्मिक आयोजनों व कुम्भ मेलों में नेत्र कुम्भ के इस मॉडल का विस्तार कर देश से रोकथाम योग्य अंधत्व को समाप्त किया जा सकता है। भारत में 1.2 करोड़ लोग दृष्टिहीन हैं, जो विश्व के कुल 4.3 करोड़ अंधत्वग्रस्त लोगों का लगभग 28% हैं। अंधता भारत का सबसे बड़ा कलंक है एवं अंधेपन से पीड़ित विश्व का प्रत्येक चौथा व्यक्ति भारतीय है। दृष्टि हीनता व दृष्टि बाधिता के प्रमुख कारणों में मोतियाबिंद (62%), ग्लूकोमा (5%), कॉर्नियल अंधता (7%), दृष्टि दोष (20%), और डायबिटिक रेटिनोपैथी व रेटिना की बीमारियाँ (4 %) शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश को समय पर उपचार द्वारा रोका जा सकता है।

भारत में आँखों की बीमारियों व उपचार योग्य अंधता उन्मूलन को लेकर कई महत्वपूर्ण शोध और रिपोर्ट प्रकाशित हुए हैं, जिनमें इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी, लांसेट ग्लोबल हेल्थ, और नेशनल ब्लाइंडनेस एंड विजन इम्पेयरमेंट सर्वे ऑफ इंडिया प्रमुख हैं। इन शोधों के अनुसार, भारत में उपचार योग्य अंधता से पीड़ित नेत्र रोगी गाँवों व छोटे कस्बों में निवास करतें हैं, जहाँ अनुभवी नेत्र चिकित्सक एवं नेत्र सर्जरी के सभी संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। यदि रोकथाम योग्य अंधत्व पर उचित ध्यान दिया जाए, तो भारत में 80% मामलों में दृष्टिहीनता को रोका जा सकता है। महाकुम्भ एवं अन्य आध्यात्मिक व धार्मिक कार्यक्रमों में ग्रामीण क्षेत्रों से लाखों लोग तीर्थ यात्रा का भाव लिए महा कुम्भ पहुँचते हैं। इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों से महाकुंभ पहुँचे रोगियों को नेत्र उपचार के साथ-साथ नेत्र दान व स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने व स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए किया जा सकता है।

महा कुम्भ में नेत्र महाकुम्भ के माध्यम से जारी नेत्र जांच शिविर, निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी, नेत्र व स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और नेत्रदान प्रेरणा कार्यक्रम पूरे भारत में अंधत्व उन्मूलन का एक सशक्ति उदाहरण बन सकता है। कल्पना कीजिए, यदि महाकुम्भ के दौरान ही 10 से 20 लाख से अधिक लोगों की नेत्र जांच हो, 50,000 से एक लाख से अधिक निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी की जाए और लाखों नेत्र रोगियों जागरुकता बढ़ाते हुए यदि निःशुल्क नेत्र चिकित्सा की जाए, तो भारत देश से अंधत्व के कलंक को हमेशा के लिए मिटाया जा सकता है।

महाकुम्भ में देश के कोने-कोने से आने वाले श्रद्धालुओं को स्वस्थ नेत्रों के महत्व, पौष्टिक आहार, विटामिन ए की कमी, और नेत्रदान के बारे में जागरूक किया जाए, तो इससे जनमानस में बड़ा बदलाव आ सकता है। यदि धार्मिक अखाड़े, आध्यात्मिक धर्माचार्य, सरकार, सामाजिक संस्थाएँ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, ऑल इंडिया ऑप्थाल्मोलॉजिकल सोसाइटी जैसी नेत्र संस्थाएं एवं सेवाभावी नेत्र चिकित्सक मिलकर इस कार्यक्रम को एक राष्ट्रीय अभियान का रूप दें, तो यह भारत को अंधत्व-मुक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।

नेत्रकुम्भ ने यह साबित कर दिया है कि यदि इच्छाशक्ति और समर्पण हो, तो लाखों नेत्र रोगियों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। नेत्र कुम्भ नामक यह सेवा का महाअभियान न केवल स्वास्थ्य सेवा का प्रतीक बना, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि भारत में कोई भी नागरिक नेत्रहीनता के अंधकार में न रहे। समय की आवश्यकता है कि इस प्रयास को और व्यापक बनाया जाए और महाकुम्भ जैसे विशाल आयोजनों को स्वास्थ्य सेवा और अंधत्व उन्मूलन के केंद्र के रूप में भी उपयोग किया जाए। इस प्रकार के प्रयास भारत को एक ऐसा देश बना सकते हैं, जहाँ हर व्यक्ति दुनिया को अपनी आँखों से स्पष्ट देख सके, और कोई भी व्यक्ति केवल इलाज के अभाव में दृष्टिहीन या दृष्टि बाधित न हो। इसके लिए प्रयागराज महाकुम्भ के दौरान आयोजित श्रद्धा और सेवा का अनूठा संगम की प्रेरणा देने वाले नेत्रकुम्भ को नेत्र जागरूकता एवं नेत्र चिकित्सा को आधार बनाकर देश से अंधता का कलंक मिटाने हेतु भविष्य में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

-डॉ सुरेश पाण्डेय

सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा
लेखक, नेत्र चिकित्सक एवं प्रेरक वक्ता.

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