सत्ता के द्वार तक पहुंचने के लिए मजबूत गठबंधन बनाने की तैयारी में है पलनीस्वामी

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-विष्णुदेव मंडल-

vishnu dev mandal
विष्णु देव मंडल

चेन्नई। एआईएडीएमके दस सालों की सत्ता विरोधी लहर और करिश्माई नेता जयललिता की असमायिक मृत्यु के बाद 2021 विधानसभा चुनाव में डीएमके से पराजित हो गई। कमोबेश 2019 के लोकसभा चुनाव एवं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी एआईएडीएमके सीटें हासिल नहीं कर सकी।
बहरहाल पार्टी अभी भी अलग अलग गुटों में बंटी हुई है। जहां पूर्व मुख्यमंत्री पलानिस्वामी पूर्व मुख्यमंत्री पनीर सेलवम को अपने साथ लेने के लिए तैयार नहीं है वही वीके शशिकला सक्रिय राजनीति में नजर नहीं आ रही हैं। टीटीवी दिनाकरन की पार्टी अम्मा मक्कल कच्छी भी तमिलनाडु में अस्तित्व विहीन है।
ऐसे में 2026 के विधानसभा चुनाव में डीएमके जैसे मजबूत काडर वाली पार्टी को राजनीतिक शिकस्त देने के लिए एक मजबूत गठबंधन बनाने की दरकार है। मंगलवार को अचानक एआईएडीएम के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री पलानी स्वामी की केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अमित शाह से उनके दिल्ली स्थित आवा पर मुलाकात से तमिलनाडु के आगामी विधानसभा में एक मजबूत गठबंधन बनाने के प्रयास के कयास लगाये जाने लगे हैं। भाजपा और एआईएडीएम का गठबंधन वर्ष 2023 में विखंडित हो गया था।
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई के लोकसभा चुनाव से पहले डीएमके और एआईएडीएमके दोनों दलों पर भ्रष्टाचार को लेकर प्रहार के कारण यह गठबंधन टूट गया था। जिसका परिणाम 2024 के लोकसभा चुनाव में नजर आया। जहां इंडिया गठबंधन को लगभग 47% वोट हासिल हुआ था वहीं एनडीए गठबंधन ने महज 18% वोट पाए थे। जबकि एआईएडीएमके को लगभग 23 प्रतिशत मत मिले थे। जबकि सीमान की पार्टी एनटीसी को लगभग 8% वोट हासिल हुआ था‌।
अब तमिलनाडु के राजनीति में एक नया खिलाड़ी भी आ गया है। यह हैं अभिनेता थलपति विजय। वह लगभग विगत वर्षों से राजनीतिक विकल्प बनने के लिए बेताब है। फिलहाल थलपति विजय डीएमके और भारतीय जनता पार्टी दोनों पर हमलावर हैं।

ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री एडापाडि पलानीस्वामी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात से यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनाव में एक मजबूत एलाइंस तैयार किया जाएगा एवं वोटो को बिखराव रोककर डीएमके को सत्ता से बाहर करने की रणनीति तय की जाएगी।
बहरहाल लोकसभा चुनाव के परिसीमन एवं राष्ट्रीय शिक्षा अधिनियम 2020 को लेकर तमिलनाडु और केंद्र सरकार के बीच तलवार खींची हुई है। भारतीय जनता पार्टी भी डीएमके के खिलाफ त्रिभाषा फॉर्मूला एवं परिसीमन पर दो-दो हाथ करने के लिए मंच सजा रहे हैं। वहीं डीएमके भी केंद्र सरकार द्वारा उनके हिस्से की रकम जारी नहीं करने के आरोप हर सभा में उठा रहे हैं। विपक्षी दलों एवं छोटे-छोटे दलों ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन राजनीतिक पंडितों का कहना है कि चुनाव आने से कुछ महीना पहले डीएमके के खिलाफ एक मजबूत गठबंधन तैयार करने के प्रति एआईएडीएमके महासचिव पलानिस्वामी बीजेपी के साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं। वहीं भाजपा के नेताओं ने भी इस बार तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई को भ्रष्टाचार के मुद्दों पर एआईएडीएमके के खिलाफ कुछ बोलने पर रोक लगा दी है‌।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

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