‘जो उचित लगे वह करो’ राहुल गांधी का कथन या कांग्रेस में अनुशासन की परीक्षा?

whatsapp image 2026 02 09 at 09.06.08
photo courtesy social media
राहुल गांधी लगातार ओबीसी वर्ग की समस्याओं, जाति जनगणना और सामाजिक न्याय की बात करते रहे हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने डॉ. अनिल जय हिंद को ओबीसी वर्ग की समस्याएं समझने और समाधान खोजने की जिम्मेदारी दी है। आज कांग्रेस मनरेगा बचाओ संघर्ष यात्रा निकाल रही है। अगर मनरेगा कमजोर होती है तो सबसे ज्यादा नुकसान ओबीसी वर्ग को होगा। ऐसे में ओबीसी विभाग का काम देशभर में नरेगा बचाओ अभियान को धार देना होना चाहिए था, न कि विधिक संगोष्ठी आयोजित करना।

-देवेन्द्र यादव-

devendra yadav
देवेन्द्र यादव

इन दिनों कांग्रेस के राजनीतिक गलियारों में राहुल गांधी का एक कथन “जो उचित लगे वह करो”  खासा चर्चा में है। सवाल यह है कि राहुल गांधी ने यह बात किस संदर्भ में कही थी? यह उनका तंज था, रणनीति थी या कार्यकर्ताओं को स्वतंत्रता देने का संकेत? इसका सही आशय तो राहुल गांधी ही बेहतर समझ सकते हैं, लेकिन पार्टी के भीतर इसके मायने कुछ और ही निकाले जा रहे हैं। राहुल गांधी के इस कथन को शायद कांग्रेस के वे नेता ज्यादा गंभीरता से ले बैठे हैं, जो बड़े-बड़े पदों पर बैठे हैं। नतीजा यह हुआ कि कई नेता अपनी तय जिम्मेदारियों से हटकर दूसरों के क्षेत्र में दखल देने लगे हैं।
राहुल गांधी के बयान के बाद का घटनाक्रम गौर करने लायक है। कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जय हिंद ने 7 फरवरी को दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में एक राष्ट्रीय विधिक संगोष्ठी आयोजित की, जिसमें मुख्य अतिथि सचिन पायलट थे और बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए। सवाल यह है कि कांग्रेस में पहले से ही राष्ट्रीय और ब्लॉक स्तर तक विधिक प्रकोष्ठ मौजूद है। ऐसे में यह संगोष्ठी विधिक प्रकोष्ठ के तहत होनी चाहिए थी, लेकिन इसका सानिध्य ओबीसी प्रकोष्ठ का रहा।
राहुल गांधी लगातार ओबीसी वर्ग की समस्याओं, जाति जनगणना और सामाजिक न्याय की बात करते रहे हैं। इसी सोच के तहत उन्होंने डॉ. अनिल जय हिंद को ओबीसी वर्ग की समस्याएं समझने और समाधान खोजने की जिम्मेदारी दी है। आज कांग्रेस मनरेगा बचाओ संघर्ष यात्रा निकाल रही है। अगर मनरेगा कमजोर होती है तो सबसे ज्यादा नुकसान ओबीसी वर्ग को होगा। ऐसे में ओबीसी विभाग का काम देशभर में नरेगा बचाओ अभियान को धार देना होना चाहिए था, न कि विधिक संगोष्ठी आयोजित करना।

whatsapp image 2026 02 09 at 09.06.08 (1)
photo courtsey social media

यही नहीं, राहुल गांधी के कथन का असर अगले दिन भी दिखा। 8 फरवरी को कांग्रेस के दो बड़े प्रवक्ता श्रीनेत और पवन खेड़ा  उत्तर प्रदेश के बनारस में संविधान संवाद मंच पर नेताओं की तरह भाषण देते नजर आए, जबकि उनकी मूल जिम्मेदारी मीडिया के सामने पार्टी की बात रखना है। यहां सवाल खड़ा होता है, क्या कांग्रेस के नेता बे-लगाम हो गए हैं? क्या उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है, उस पर ध्यान देने के बजाय वे दूसरों के क्षेत्र में उतर रहे हैं? इससे पार्टी को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है, क्योंकि जिम्मेदार लोग अपनी भूमिका से भटक जाते हैं।
श्रीनेत और पवन खेड़ा को लेकर पार्टी के गलियारों में चर्चा है कि दोनों की नजर इस साल होने वाले राज्यसभा चुनाव पर है। दोनों चाहते हैं कि हाईकमान उन्हें संसद तक पहुंचाए। शायद यही वजह है कि वे मीडिया मंच से निकलकर सार्वजनिक मंचों पर नेताओं की तरह भाषण देते नजर आ रहे हैं, जबकि उनका असली काम कांग्रेस की नीतियों को प्रेस के माध्यम से जनता तक पहुंचाना है।
दरअसल, राहुल गांधी का “जो उचित लगे वह करो” का संदर्भ कुछ और रहा होगा, लेकिन यह कथन कांग्रेस के भीतर नेताओं को परखने का पैमाना बन गया है। इससे साफ दिखता है कि कौन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है और कौन दूसरों के काम में टांग अड़ा रहा है। मैं पहले भी कह चुका हूं कि राहुल गांधी को रास्ते से भटकाने वाले लोग कौन हैं, इसका जवाब इसी बयान में छिपा है। जब नेता अपनी तय भूमिका छोड़कर दूसरे विभागों में दखल देने लगते हैं, तभी समझ आता है कि राहुल गांधी को उनके ट्रैक से कौन उतार रहा है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

Advertisement
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments