
कोटा। ग्रामीणों को जैविक खाद से तैयार वाटिकाऐं विकसित कर उन्हें आर्थिक उपार्जन का माध्यम बनाने पर जोर दिया गया। दीगोद क्षैत्र के ग्राम शोली में आदर्श जैविक ग्राम में पोषण वाटिका प्रशिक्षण शिविर में कृषि विज्ञान केंद्र की अधिकारी गुजन सनाढ्य ने महिलाओं को गोबर की खाद से सब्जियों के उत्पादन की जानकारी दी और बताया कि किस प्रकार हम पोष्टिक तरकारियां उगा कर रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा दे सकते है। इसमें बहुत ज्यादा श्रम की आवश्यकता भी नहीं है मौजूदा संसाधानों को व्यवस्थित कर जीवन को स्वस्थ बना सकते है। केंद्र के वैज्ञानिक डाक्टर नागर ने भी जैविक खादों तथा पशुपालन पर तथ्यात्मक जानकारी दी। जल बिरादरी चम्बल संसद के समन्वयक बृजेश विजयवर्गीय ने ग्रामीणों को गोबर की रेवड़ियों को कचरा पाइंट न बनाने का आग्रह किया।
कोटा एनवायरमेंटल सेनीटेशन सोसायटी के माध्यम से कचरे का पृथक्कीकरण कर हम इसे कंचन में बदलने का काम कर रहे है। उन्होंने कहा कि जल की एक एक बूंद को बचाने का विचार किसानों के मन में रहना चाहिए। जल जंगन और जमीन के प्रति संरक्षण का भाव रखें। प्रगतिशील किसान रामनिवास राठौड़ ने जैविक खेती पर अपने अनुभव साझा किए। संचालक रामकृष्ण शिक्षण संस्था के महामंत्री युधिष्ठिर चानसी ने बताया कि कट्स के सहयोग से वाटिका प्रशिक्षण कार्यक्रमों में गा्रीमणों में जैविक कृषि के प्रति रूचि पैदा की जा रही है। इस अवसर पर उन्नत बीजों का भी वितरण किया गया।














