
नए साल में पहली ” विरासत – बैठक “
-पुरुषोत्तम पंचोली-

कोटा। रविवार की सर्द रात में कोटा के गढ़ पैलेस स्थित बादल महल के कंगूरों पर, बासंती बयार की आहट से आसमान में बौराए आवारा बादलों का जमघट लगा था, वहीं असम की धरती से बीहू की अगवानी में आई “सत्रीय नृत्य” की सजीली नृत्यांगना मीनाक्षी के मोहक पद तिलिस्म से मंत्रबिद्ध दर्शकों के हिवड़े में हिलोरें उठ रही थी.
अपने अदभुत अलाप और अंदाज में कबीर के भजनों को आम जनों तक पहुँचाने के लिए प्रख्यात,लोक गायक प्रहलाद ने ऐसा आल्हाद बिखेरा कि श्रोता विस्मय विमुग्ध हो ” कबीर बाणी ” में जीवन की सार्थकता खोजने लगे.
अपनी विरासत और धरोहर को जानने- समझने और उसकी महत्ता को जन जन तक पहुंचाने में जुटे “हैरिटेज वॉक्स” के प्रणेता सर्वेश सिंह हाड़ा के प्रयासों से, “स्पिक मैके ” जैसी संस्था के समर्थन से और “प्रांजल अग्रवाल इन्वेस्टमेंट्स” के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के संगीत, नृत्य, कला और विरासत के कद्रदान श्रोताओं – दर्शकों ने आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की.
आयोजन की शरुआत में नृत्यांगना मीनाक्षी मेधी ने अपनी प्रस्तुति में असम की ख्यात नृत्य विधा- ” सत्र ” की बानगी प्रदर्शित की. भारत समेत दुनिया के आठ देशों के वंचित विद्यार्थियों को सत्रीय नृत्य की सु शिक्षा देने वाली आदर्श शिक्षिका, ” सत्कार फाउंडेशन ” व ” सत्रीया नृत्य शाला ” की संस्थापक मीनाक्षी सन 2010 से देश भारत में प्रमुख नृत्य महोत्सवों में अपनी नृत्य प्रतिभा से अपार प्रशस्तियां पाती रही हैं. मीनाक्षी की भाव प्रवण मुद्राओं और जटिल बिम्ब भंगिमाओं से अनूठे विस्मय का आगाज होता है.एक समर्पित शिक्षिका और जुनूनी नृत्य साधिका की सद्य प्रस्तुति पर सुधि श्रोताओं ने भरपूर करतल ध्वनि से सराहना की.
शीत समीर के चुभते तीरों की अनदेखी कर नील गगन तले सजी विरासत-बैठक में उपस्थित श्रोताओं के बीच मालवा हरफनमौला लोकगायक प्रहलाद सिंह टिपानिया ने जब लोक प्रसिद्ध भजन – ” काया गार से काची…” गाया तो लय, सुर, ताल की भावुक टेर में श्रोता आध्यत्मिक चेतना में खो से गए.
मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के छोटे से गांव में जन्मे टिपानिया ने एक सरकारी अध्यापक के तौर पर जीवन और जीविका की शुरुआत की, पर कबीरबाणी की भजनमंडलियों के सम्पर्क ने उन्हें जल्द ही अनुपम आध्यात्मिकता के सजग जागरण पुरुष में तब्दील कर दिया. पाखंड और सामाजिक विसंगतियों को चीर चीर कर कबीर के पैगाम को आम अवाम तक पहुंचाने में लगे प्रहलाद सिंह ने यू एस, कनाडा सहित अनेक वैश्विक मंचों पर कबीर के सन्देश का जीवंत पाठ किया है. उहे मध्यप्रदेश के आला दर्जे के पुरुस्कारों के अलावा देश लब्ध प्रतिष्ठ ” पद्म श्री ” पुरुस्कार तथा संगीत और नाटक अकादमी पुरुस्कार से विभूषित किया जा चुका है. वे अपने गायन की गुणवत्ता-संवर्धन के लिए वह सदैव लोक वाद्यों का सहारा लेते हैं. टिपानिया खुद तम्बूरा और खरताल बजाते हैं. उनके सहयोगी संगत जन भी लोक वाद्यों की रसीली बरखा कर मुग्ध श्रोताओं को बरबस बांध लेते हैं.
विरासत-बैठक की इस अनूठी पहल की विशेषता यह भी है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के अनमोल कलाकारों की पेशकश के साथ, स्थान चयन में शहर की वैभवशाली विरासत से भी आगंतुकों का साक्षात्कार यहाँ शिद्द्त से कराया जाता है.
बैठक-विरासत के संयोजक सर्वेश सिंह हाड़ा के मुताबिक, आगामी प्रस्तुति 22 फरवरी ‘ 26 को होगी. सितार की एकल प्रस्तुति के खातिर शुभेद्र राव बैठक में रहेंगे. उनके साथ सस्किया राव अपनी प्रस्तुति विरासत को नव वितान देंगे.

















