
-देवेन्द्र यादव-

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ एक बार फिर से चर्चा में है चर्चा इसलिए नहीं है कि चंद्रचूड़ अगले महीने नवंबर 2024 को रिटायर हो रहे हैं, बल्कि चर्चा न्याय की देवी की मूर्ति को लेकर हो रही है। न्याय की देवी की मूर्ति की आंखों से पट्टी हटा दी गई है और न्याय की देवी के हाथ से तलवार हटाकर संविधान की किताब हाथ में थमा दी है। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि लोग मुझे किस रूप में याद करेंगे। न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल में दो ऐसे कार्य किए हैं, जिन्हें लोग देख कर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ को याद करेंगे! चंद्रचूड़ ने 26 नवंबर 2023 को देश के सर्वाेच्च न्यायालय परिसर में 76 साल के बाद पहली बार संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापित की और 17 अक्टूबर 2024 को न्याय की देवी के हाथों से तलवार हटाकर बाबा साहब अंबेडकर द्वारा लिखा गया संविधान थमाया।
यह दोनों काम देश की आजादी के बाद से अब तक देश का कोई भी न्यायाधीश नहीं कर पाया था। वह काम न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने अपने कार्यकाल में करके दिखाया इसलिए देश उन्हें याद रखेगा। 26 नवंबर 2023 को जब सर्वाेच्च न्यायालय में बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति स्थापित की गई थी, शायद उस समय न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने निर्णय कर लिया था कि न्याय की देवी के हाथ से तलवार हटाकर हाथ में संविधान थमाना चाहिए क्योंकि देश संविधान से चलता है और संविधान से चल रहा है। न्यायालय भी संविधान से ही चलते हैं और न्याय भी संविधान में लिखी बातों से मिलते हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने देश को बता दिया कि देश के लिए संविधान सर्वाेपरि है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे संविधान की रक्षा करने का अभियान देश भर में चला रहे हैं। न्याय की देवी के हाथों से तलवार हटाकर संविधान हाथ में देना इशारा कर रहा है कि देश के लिए संविधान सर्वाेपरि है, देश संविधान से चलता है और चलता रहेगा !
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

















