
-कृष्ण बलदेव हाडा-
कोटा। कोटा के वन्यजीव एवं प्रकृति प्रेमियों ने कहा कि मुंकुंदरा हिल्स टाईगर रिजर्व में बाघों को आबाद किये बिना यहां के सकल विकास की कल्पना भी मुश्किल है। जब तक यहां बाघों को लाकर आबाद नहीं किया जाता, इस टाइगर रिजर्व में देशी-विदेशी पर्यटन को बढावा नही मिलेगा तथा एेसे हालात में स्थानीय युवाआें के लिये रोजगार के अवसर उत्पन्न नहीं किये जा सकते। वन्यजीव व प्रकृति प्रेमियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिज़र्व के मुख्य वन संरक्षक एवं निदेशक शारदा प्रताप सिंह से मुलाकात कर मुकुन्दरा अभयारण्य में बाघों के कुनबे को बसाने में हो रहे विलंब और इसके तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की। शिष्टमंडल में ‘हम लोग’ के संयोजक डॉ सुधीर गुप्ता, कुंदन चीता, धीरज गुप्ता एवं पगमार्क फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष देवव्रत सिंह हाडा शामिल थे।
बाघों की सुरक्षा के लिए गिरधरपुरा गांव के पुनर्वास के काम को प्राथमिकता पर लेना चाहिए
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि राजस्थान सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर मुकुन्दरा के दरा क्षेत्र को विकसित किया। बाघ की सुरक्षा और एनक्लोजर की व्यवस्थाओं के लिए काम हुआ, इसके बावजूद बाघिन एमटी-4 को सेल्जर में शिफ्ट कर इस इलाके को विकास की द्रष्टि से वंचित किया जा रहा है। चर्चा के दौरान बताया गया कि सेल्जर क्षेत्र के आसपास के गांवों को पूर्णतः विस्थापित नहीं किया गया है, जिससे यहां बाघों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है। विभाग को बाघों की सुरक्षा के लिए गिरधरपुरा गांव के पुनर्वास के काम को प्राथमिकता पर लेना चाहिए था।
अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन की शर्त रखने की मांग भी उठाई
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि दरा क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से अग्रिम पंक्ति में नहीं रखा गया तो मुकुन्दरा अभयारण्य का समुचित विकास संभव नहीं है। इस अवसर पर अभयारण्य क्षेत्र में पर्यटकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के संचालन की शर्त रखने की मांग भी उठाई गई।मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह ने बताया कि दरा में बाघों को बसाने के संबंध में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की आपत्तियों का निस्तारण कर दिया गया है, शीघ्र ही इस पर निर्णय होने वाला है।

















