” दशकूप समवापी,दशवापी समहृद:, दशहृद: सम:पुत्रो,दशपुत्र समुद्रम।।”

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-भारतीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का एक अनूठा प्रयास

कोटा: राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में एक अद्वितीय पहल के तहत, 1991 बैच के पूर्व छात्रों ने एक नक्षत्र वाटिका का निर्माण किया है जो भारतीय संस्कृति और प्रकृति संरक्षण का एक अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है। इस वाटिका में 9 ग्रहों, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के अनुसार वृक्षारोपण किया गया है। यह पहल प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को जोड़ती है। नक्षत्र वाटिका केवल एक बगीचा नहीं है, बल्कि यह एक विचार है। यह भारतीय अध्यात्मवाद और प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जीवन शैली से जोड़ने का प्रयास है। यह दुर्लभ और लुप्तप्राय पौधों को संरक्षित करने में भी मदद करेगा।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस. के. सिंह ने वनौषधि नक्षत्र वाटिका में पीपल का वृक्ष लगाकर उद्घाटन किया। इस परियोजना को सफल बनाने में विश्वविद्यालय के बैच 1991 के पूर्व छात्रों की अहम भूमिका रही है। मेकेनिकल विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आनंद चतुर्वेदी के नेतृत्व में इन पूर्व छात्रों जितेंद्र शर्मा (JK कंसल्टेंट एंड बिल्डर्स), अचल श्रीधर (एक्सेनचर), सुनील शर्मा (एसई, आरवीपीएनएल कोटा में कार्यरत), अनिल दीक्षित (वर्क्स मैनेजर, स्टोन शिपर), शिव कुमार (एक्सईएन, आरवीयूएनएल छबड़ा), प्रवीण जैगिसॉट (एक्सईएन, आरवीयूएनएल), मलकीत सिंह (एसई, आरवीयूएनएल कोटा), रजनीश विद्यार्थी (डीटीओ, सिरोही), और विशम्बर सहाय (एसई, जेवीवीएनएल झालावाड़) जैसे कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व ने मिलकर इस वाटिका को साकार किया है।

ये सभी लोग आजकल विभिन्न संस्थानों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। इन पूर्व छात्रों ने पर्यावरण के महत्व को समझते हुए मिलकर यह वाटिका बनवाई है।

” दशकूप समवापी,दशवापी समहृद:,
दशहृद: सम:पुत्रो,दशपुत्र समुद्रम।।”

दस कुए एक बावड़ी के समान होते हैं, दस बावड़ी एक तालाब के समान, दस तालाब एक पुत्र के समान और दस पुत्रों के समान एक वृक्ष होता है। इस के अनुरूप, पूर्व छात्रों ने मिलकर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए यह वाटिका स्थापित की है।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस.के. सिंह ने पूर्व छात्रों को इस नवाचार के लिए और डॉ अनुपमा चतुर्वेदी जो आयुर्वेद महाविद्यालय कोटा में कार्यरत वनौषधि विशेषज्ञ है ,को उनके द्वारा दिए सहयोग के लिए विशेष रूप से धन्यवाद दिया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दिनेश बिरला (एसोसिएट डीन), मुनीश बिंदल और मनीष चतुर्वेदी भी उपस्थित रहे।

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