जिस में अहसास नहीं उस पे असर क्या होगा। दिल भी दिल है उसी पत्थर से वफ़ा माॅंगे है।।

ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

दिल मेरा ज़ुल्मो-सितम* जोरो-जफ़ा* माॉंगे है।
उसका हक़ है वो मुहब्बत की सज़ा माॅंगे है।।
*.
जाने कब होगी ज़मीं ज़ोरे- फ़लक* से आज़ाद।
हर बशर* अब तो यही रोज़ दुआ माॅंगे है।।
*
फिर मेरे सर पे वही चर्ख़े- सितम* टूटेगा।
फिर कोई मुझसे नया अहदे-वफ़ा* माॅंगे है।।

जिस में अहसास नहीं उस पे असर क्या होगा।
दिल भी दिल है उसी पत्थर से वफ़ा माॅंगे है।।
*
दिल कभी दार* का तालिब* कभी सहराओँ* का।
कभी किस शय* की तलब* है कभी क्या माॉंगे है।।
*
तेरा “अनवर” तेरे दरबार में हाज़िर आया।
और माॅंगे है तो बस सबका भला माॅंगे है।।
*

ज़ुल्मो-सितम*ज़ुल्म,अत्याचार
ज़ोरो जफ़ा*ज़ुल्म, ज़्यादती
जोरे-फ़लक*आसमा के शिकंजे से
हर बशर*हर व्यक्ति
चर्ख़े-सितम*आसमान के ज़ुल्म ज़्यादती
अहदे-वफ़ा*प्रेम करने का वादा
दार* सूली
तालिब*इच्छुक
सहराओ*रेगिस्तान
शय*वस्तु चीज़
तलब*इच्छा

शकूर अनवर
9460851271

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