सहेलियां तो अब भी हैं वे दोनों पर…

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बड़ी छोटी

-विनोद पदरज-

vinod padraj
विनोद पदरज

वैसे तो वे सहेलियों जैसी थीं
फिर भी बड़ी को बड़ी होने का अहसास था
वह समय समय पर छोटी को समझाती रहती थी
हिदायत देती रहती थी
क्या ग़लत है क्या सही है बताती रहती थी
जैसे कहती थी -तू आजकल बिलकुल नहीं पढ़ती है
पढ़ाई पर ध्यान दे
मम्मी पापा कितना खर्चा कर रहे हैं
और ये जंक फूड मत खाया कर

घर में इतना तो अच्छा खाना बनाती है मम्मी
बाज़ार का तो ज़हर है ज़हर

और पिछली बार तूने हफ्ते भर में ही महीने भर का जेब खर्च उड़ा दिया
मैं भी कहां तक दूँ अपने में से

और रात कोचिंग से लेट क्यों हो गई
मम्मी पापा कुछ कहते नहीं तुझसे
इसका मतलब यह तो नहीं कि मनमर्जी करेगी

छोटी भी बड़ी को बड़ी मानती थी
उसके कहे का बुरा नहीं मानती थी
बस टुकुर टुकुर देखती रहती थी चुपचाप

पर अब मामला उलट है

हुआ यूँ कि बड़ी छोटी दोनों की शादी हुई क्रमश :
पर बच्चा छोटी के पहले हुआ संयोग से

अब छोटी हिदायत देती है समझाती है
-दीदी बच्चा सोये तभी सो लेना चाहिए
नहीं तो नींद पूरी नहीं होती

और ऊपर का दूध क्यों पिलाती है
छ महीने तो डॉक्टर भी मना करते हैं
और टीके समय पर लगवाना चार्ट बनवा लेना
और बच्चा दो ही वज़ह से रोता है
या तो भूखा हो या उसके कहीं दर्द हो जैसे पेट में गैस हो
अपच हो
नहीं तो छोटा बच्चा सोता रहता है

पर ये बात भी है दीदी कि कई बच्चे दिन में सोते हैं रात में जागते हैं
ऐसे में बाई हो तो अच्छा रहता है

और खुद के खाने पीने का भी खूब ध्यान रखना हेल्दी फूड लेना
इस समय की कमजोरी जीवन भर रह जाती है
और डाइपर भी चेक करते रहना चाहिए
बच्चा गीले में ही पड़ा रहता है

सहेलियां तो अब भी हैं वे दोनों
पर अब बड़ी टुकुर टुकुर देखती रहती है
चुपचाप

(स्मृतियों के कोठार से)

Vinod Padraj

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