-कृष्ण बलदेव हाडा-
कोटा। रियासत काल में नंद ग्राम के नाम से जाने-पहचाने जाने वाले राजस्थान के कोटा शहर में आज भगवान श्री कृष्ण का जन्म-प्रकट महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के मंदिरों में राजभोग-पूजन के विशेष कार्यक्रम एवं धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। कोटा में जन्माष्टमी का मुख्य समारोह पाटनपोल के प्राचीन मथुरादास मंदिर में आयोजित किया गया जहां आज तड़के से ही श्रद्धालुओं के आने का ताता लगा रहा। इसी मंदिर की वजह से रियासतकाल में धर्मावलंबी कोटा को बड़े मथुराधीश जी की नगरी भी कहा करते थे और उस जमाने में परकोटे के भीतर बसे सघन आबादी वाले कोटा को नंद ग्राम के नाम से भी जाना जाता था।
महाराव दुर्जनसाल ने कोटा का नामकरण नंद ग्राम किया
ऐसी धार्मिक-ऐतिहासिक मान्यता है कि भगवान मथुराधीश जी छोटी काशी के रूप में अपनी पृथक पहचान रखने वाले बूंदी नगरी में विराजमान थे जहां से वर्ष 1737 में कोटा लाकर तत्कालीन कोटा रियासत के मंत्री द्वारका प्रसाद भटनागर की पाटनपोल स्थित हवेली में पधराया और कोटा के तत्कालीन हाड़ा महाराव दुर्जनसाल ने कोटा का नामकरण नंद ग्राम किया। भगवान मथुराधीश जी के इस प्राचीन मंदिर और उसके प्रति लोगों की अटूट आस्था के कारण कोटा की पहचान भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की नगरी के रूप में भी रही है। जिस समय बूंदी से कोटा लाकर पाटनपोल के भगवान मथुराधीश जी के मंदिर में वल्लभ कुल की मर्यादाओं के अनुरूप मंदिर में वल्लभ कुल की मर्यादाओं के अनुरूप ही सेवा-पूजन की जाती है। इस मंदिर को वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ भी माना जाता है क्योंकि यहां स्थापित मथुराधीश जी की प्रतिमा भगवान श्रीकृष्ण के वल्लभमय सप्त स्वरूपों में प्रथमेश है।
शोभायात्रा का हिस्सा बनने के लिए कई हजार अनुयाई उमड़ पड़े थे

देश के आजादी के बाद वर्ष 1953 में पाटनपोल से भगवान मथुराधीश जी को ले जाया गया था लेकिन करीब 22 साल बाद जब 1975 में मथुराधीश जी को कोटा लाया गया तो उस समय निकली शोभायात्रा का हिस्सा बनने के लिए हाडोती संभाग के ही नहीं बल्कि पूरे देश से हजारों-हजार वल्लभ संप्रदाय के कई हजार अनुयाई उमड़ पड़े थे और तब किशोरपुरा स्थित छप्पन भोग में भव्य समारोह के बाद भगवान मथुराधीश जी को वापस पाटनपोल मंदिर में पधराया गया था।
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर आज भी प्रातः पांच बजे मथुराधीश जी के मंदिर में दर्शन शुरू हुये और यह संचालन निर्धारित अंतराल के बाद रात्रि तक जारी रहा। शाम छह बजे से जागरण शुरु हुआ जो मध्य रात्रि तक चलेगा और कल सुबह यहां नंद महोत्सव आयोजित किया जाएगा। कृष्ण जन्मोत्सव पर पाटनपोल के ही महाप्रभु जी के प्राचीन मंदिर में विशेष धूमधाम रही और आज सुबह से लेकर रात तक अनेक धार्मिक आयोजन किये गए। मंदिर में दर्शन और पट प्रातः पांच बजे खोल दिए गए थे। इसके अलावा आज कोटा में गीता भवन, तलवंडी के राधा-कृष्ण मंदिर फतेहगढ़(लाडपुरा) की श्रीधरनाथ मंदिर, केशवपुरा के केशव-जानकी मंदिर, रावतभाटा रोड पर विकसित मुकुंदरा विहार के हरे-कृष्ण मंदिर में अनेक धार्मिक अनुष्ठान हुए। मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण की झांकिया सजाई गई थी।
सरकारी कार्यालयों में शनिवार को अवकाश रहेगा
भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पौराणिक मान्यता के कारण मध्य रात्रि से कोटा की कृष्ण मंदिरों में दर्शन-धार्मिक अनुष्ठान की परंपरा के चलते ही यहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थी उमड़ते हैं और यह सिलसिला तड़के तक चलने के कारण राज्य के अन्य हिस्सों से इतर कोटा में राजकीय अवकाश अगले दिन रहता है। यहां के सरकारी कार्यालयों में शनिवार को अवकाश रहेगा। कोटा से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के श्रद्धालुओं के कृष्ण जन्माष्टमी मेले में भाग लेने के लिए मथुरा जाने के कारण कोटा से मथुरा के बीच 21 अगस्त तक विशेष रेल भी चलाई जा रही है।

















