
– हजारों की संख्या में नदी में विसर्जित होती हैं प्रतिमाएं
– महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती से बातचीत
-शैलेश पाण्डेय-

कोटा। मौजी बाबा लोक कल्याण ट्रस्ट की अध्यक्ष एवं अनंत चुतर्दशी आयोजन समिति कोटा की मुखिया महामंडलेश्वर हेमा सरस्वती का कहना है कि चंबल नदी हमारी जीवनदायनी और पूजनीय है। इसको प्रदूषण मुक्त रखना हम सभी का दायित्व है। अनंत चुतर्दशी पर पीओपी की प्रतिमाओं के विसर्जन से देश की सबसे स्वच्छ नदियों में शुमार चंबल का पानी प्रदूषित होता है। इससे न केवल मानव जीवन बल्कि इस नदी पर निर्भर जल जीव जंतुओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। एक शोध के अनुरूप पीओपी की प्रतिमा को पूरी तरह गलने में करीब 15 वर्ष का समय लगता है। डॉ हेमा सरस्वती से बातचीत …
प्र. गणेश जी की बड़ी प्रतिमाओं की स्थापना कहां तक उचित है?
उ. भगवान गणेश का विग्रह जितना छोटा होगा उसकी महत्ता उतनी ही अधिक होगी। श्रद्धालु घर में मिट्टी से निर्मित गणेश की प्रतिमा की स्थापना करें ना कि पीओपी की। घर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। जब हम उनकी पूरी भक्तिभाव से पूजा करते हैं तो गणेशोत्सव पर भी ऐसा ही कर सकते हैं।
प्र. मूर्ति का किस तरह करें?
उ. गणेशोत्सव पर पूजन के बाद अनंत चतुर्दशी पर घर में विधि विधान से एक थाली या परात में मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमा का विसर्जन करें और उस पानी को गमले या पौधों में डाल दें। इससे गणपति की कृपा हमेशा बनी रहेगी।
प्र. इस उत्सव का ध्येय क्या है?
उ. गणेशोत्सव पर जगह-जगह विशालकाय प्रतिमाओं की स्थापना गलत है। महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की शुरूआत समाज को एक जुट करने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन अब इस भावना की बजाय हम आपसी कंपटीशन में विशाल प्रतिमाओं की स्थापना करने लगे हैं। सभी जगह ऐसा हो रहा है। हमारा ध्येय भी ‘संघे शक्ति कलियुगे’ है। गली-गली में प्रतिमाओं की स्थापना के बजाय वार्ड आधार पर आयोजन किए जाएं तो कम से पूरे वार्ड के लोग इस उत्सव पर आपस में एक साथ मेल जोल कर सकेंगे। यदि प्रत्येक गली में ऐसा होगा तो उनकी जान पहचान और पहुंच का दायरा भी उतने से सीमित क्षेत्र में होगा।
प्र. आप क्या प्रयास कर रहे हैं?
उ. हम प्रशासन से पीओपी की प्रतिमाओं पर रोक की लगातार मांग कर रहे हैं। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली है। लेकिन जब तक मूर्ति निर्माताओं के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती और समाज में जागरूकता नहीं बढ़ती तब तक सफलता नहीं मिलेगी। क्योंकि इन प्रतिमाओं का विसर्जन चंबल नदी या तालाब में ही किया जाता है इससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। यदि इस पर रोक नहीं लगी तो हमें भविष्य में शुद्ध पेयजल भी नसीब नहीं होगा। प्रशासन को भी इस मामले में सख्ती बरतनी होगी। मौजी बाबा गुफा आश्रम का उदाहरण सामने है। हम यहां किसी को पीओपी की और बड़ी प्रतिमा विसर्जित नहीं करने देते। हालांकि जो लोग प्रतिमाएं लेकर आते हैं उनके विरोध का भी सामना करना पड़ता है लेकिन यदि आप अपने रूख पर अडिग रहें तो सफलता मिलती है।
प्र. एकत्र हुई पूजन सामग्री को कहां रखे?
उ. कई बार तो श्रद्धालु बाहर ही पूजा सामग्री फेंक जाते हैं जिसे हम अगले दिन डम्पर से कचरा केन्द्र पर भिजवाते हैं। श्रद्धालुओं को पूजा सामग्री घर में किसी ड्रम जैसे पात्र में एकत्र कर खाद बनानी चाहिए ताकि उस पूजन सामग्री का भी अपमान नहीं हो और खाद का पेड़ पौधों में उपयोग किया जा सके।
प्र. अनंत चतुर्दशी आयोजन समिति की अध्यक्ष की आपकी क्या भूमिका रहती है?
उ. शोभा यात्रा को सुचारू और आकर्षक बनाए रखने के लिए हर साल प्रयास करते हैं। 70 सालों में पहली बार किसी महिला को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। शोभा यात्रा में किस तरह की प्रतिमाओं की भागीदारी होगी और कौन-कौन से अखाडे भाग लेंगे इस पर ध्यान रखते हैं। किसी को कोई समस्या नहीं हो इसके लिए शोभा यात्रा के दिन भी नजर रखते हैं।
प्र. मार्ग में जर्जर इमारतों से डर नही लगता?
उ. जर्जर इमारतों पर बैठकर लोग शोभा यात्रा नहीं देखें इसको रोकने का भी इंतजाम प्रशासन की मदद से करते हैं। हालांकि प्रशासन भी पुलिस बल और ड्रोन से ऐसी इमारतों पर निगरानी रखता है। समिति के करीब 250 स्वयं सेवक भी निगरानी रखते हैं। साथ ही जुलूस जब मध्य भाग में पहुंच जाता है तो, मैं स्वयं सभी अखाड़ों के पास जाकर व्यवस्थाए देखती हूं।
प्र. क्या प्रशासन भी आपके सुझाओं पर अमल करता है?
उ. हॉ प्रशासन भी समय समय पर बैठक लेता है। हालांकि अभी प्रशासन ने कोई बैठक नहीं ली है। लेकिन शोभायात्रा समिति ने अपने स्तर पर अखाड़ों, भजन मण्डलियों, बैण्ड, वाहनों व अन्य के सम्बन्ध में बैठक लेकर सभी के लिए समितियों का गठन कर दिया है। अखाड़ो में इस वर्ष तीन फीट की प्रतिमा ही रखने का सुझाव आया है। साथ ही गणेश की प्रतिमाए भी मिट्टी या पीओपी के स्थान पर धातु की हों तो उन्हें स्नान कराकर वापस ले जाया जा सकता है।
प्र. सामाजिक संगठनों का कितना सहयोग रहता है?
उ. जहां तक सामाजिक संगठनों के सहयोग की बात है तो स्कूलों,संस्थाओं में मिट्टी की गणेश प्रतिमाए बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसमें हम लोग संस्था, मारूती के प्रेम भाटिया सहित कई सामाजिक संस्थाओं का सहयोग मिल रहा है। लोग अब जागरूक भी होने लगे हैं। प्रशासन थोड़ी सख्ती बरत ले तो काम आसान हो जाए।

















