
– विवेक कुमार मिश्र

सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में
एक ऐसी दुनिया में
जो बहुत अलग है पृथ्वी से
पृथ्वी से दूर जाकर पृथ्वी की यादें
कितनी घनी हो जाती हैं
यह महसूस करने की बात है
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में रहते रहते
हर क्षण इस अहसास को सहा , महसूस किया कि
पृथ्वी से कितनी दूर और कहां है
अंतरिक्ष में सुनीता विलियम्स का जाना
सहज ही पूरे देश को
गर्व की अनुभूति से भर देता है
अंतरिक्ष में 8 दिनों के लिए
सुनीता विलियम्स गई थी
पर उन्हें 286 दिन रहना पड़ गया
कल्पना कर सकते हैं कि
कितना कठिन रहा होगा कि
आपकी यात्रा 8 दिन के लिए हों
और यात्रा एक अंतहीन यात्रा बन जाएं तो
कितनी कितनी दिक्कतें हो सकती हैं
कैसे रही होगी उस दुनिया में
जहां रहना आसान नहीं होता
अंतरिक्ष में जहां भारहीनता में रहना होता है
वहां सबसे ज्यादा अंतरिक्ष में वाक् करती रही
अंतरिक्ष में होना अपने आप में ही उपलब्धि होती है
अंतरिक्ष से पुनः पृथ्वी को छुना एक सपने जैसा ही है
आदमी चाहे तो क्या से क्या कर सकता है
इसे सामान्य ढ़ंग से सोच भी नहीं सकते
कहां अंतरिक्ष में और कहा पृथ्वी की सतह
पृथ्वी को छुना पृथ्वी को जीना
एक अलग ही अहसास होता है ।