
-प्रकाश केवडे-

सर्दियों की धूप
सुबह सवेरे आंगन में
ठंडे पानी से नहा कर
मासूम सी प्यारी सी
आ जाती सर्दीयों की धूप ।
नर्म नाजुक मनभावन
नवेली दुल्हन सी शर्माती
कभी नन्ही परी सी
छुपती, खेलती,इठलाती
मुस्काती,सर्दियों की धूप ।
जल्दाज है ये बहुत
रूकती नही जरा भी
शाम होते जाने कहां
भाग जाती सर्दियों की धूप।
रचियता प्रकाश केवडे
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