-डॉ विवेक कुमार मिश्र-
कोटा। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। सभी एकादशियों में देवउठनी एकादशी विशेष महत्व रखती है। इस दिन श्रीहरि चार माह बाद योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास की समाप्ति होती है। 4 नवंबर शुक्रवार को देवउठनी एकादशी पर कोटा में दीपावली जैसी धूम नजर आई।
इस दिन बडी संख्या में शादी विवाह हुए तो लोगों ने घर और मंदिरों में देव उठाने की रस्म की। शाम सात बजे से ही लोगों ने पूजा पाठ के बाद जमकर आतिशबाजी की। चातुर्मास के बाद विवाह समारोह की आज से शुरूआत हुई। सडकों पर बारातों का शोर शराबा देखने को मिला। वहीं गली मोहल्लों में बच्चों ने जमकर आतिशबाजी की।
मान्यता है कि देवउठनी एकादशी का व्रत करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जातक मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम को जाता है। स्वंय श्रीकृष्ण ने एकादशी की महत्ता के बारे में युधिष्ठिर को बताया था। कहते हैं कि देवउठनी एकादशी पर प्रदोष काल में गन्ने का मंडर बनाकर श्रीहरि के स्वरूप शालीग्राम और तुलसी विवाह के बाद कथा का श्रवण जरूर करना चाहिए, इसके सुनने मात्र से पाप कर्म खत्म हो जाता है।















