
पुरुषोत्तम पंचोली का लेखन केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक चेतना का स्वर है। ऐसे समय में उनकी सक्रियता लोकतांत्रिक विमर्श के लिए प्रेरणादायी और स्वागतयोग्य है।
-अख्तर खान अकेला-
शब्द यदि व्यवस्था से प्रश्न करें, अन्याय से टकराएँ और जनहित के पक्ष में निर्भीक खड़े हों तो वे केवल शब्द नहीं रहते, आंदोलन बन जाते हैं। ऐसे ही शब्दों के सिपाही और शब्द–युद्ध के सेनापति वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं संपादक पुरुषोत्तम पंचोली एक बार फिर अपनी पैनी कलम के साथ सार्वजनिक विमर्श में सक्रिय हुए हैं। हाल ही में हाड़ौती पर्यटन, पैनोरमा सहित अनेक सरकारी उपेक्षित एवं विवादित योजनाओं पर उनके लेखन ने विचार–जगत में नई बहस को जन्म दिया है।
हिंदी भाषा पर पूर्ण अधिकार रखने वाले पंचोली जी स्वभाव से मिलनसार, मृदुभाषी, मित्रों के मित्र और जरूरतमंदों के सहायक हैं। निरंतर साहित्य साधना में लीन रहते हुए उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

शैक्षणिक दृष्टि से आपने हिंदी में प्रथम श्रेणी में एम.ए., एम.कॉम तथा गांधी दर्शन में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। जर्मनी के बर्लिन विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की विशेष योग्यता हासिल की। पत्रकारिता के एक प्रकल्प के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन और जोहांसबर्ग की अध्ययन यात्रा भी की।
आपका उपन्यास “मॉर्निंग वॉक” राजस्थान साहित्य अकादमी से प्रकाशित होकर बहुप्रशंसित रहा। हाल ही में संस्मरण संग्रह “करोगे याद तो…” प्रकाशित हुआ है। पत्रकारिता पर आपकी दो पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैं। आपने शोध–पत्रिका “चिदम्बरा” तथा अपने पाक्षिक समाचार पत्र “शब्द युद्ध” का दीर्घकाल तक सफल संपादन किया।
पत्रकार के रूप में आपने नवभारत टाइम्स और जनसत्ता में लगभग तीन दशकों तक सेवाएँ दीं तथा कुछ समय आउटलुक पत्रिका से भी जुड़े रहे। हैदराबाद में देश के पहले बहुभाषी पोर्टल में फ़ीचर संपादक रहे। आपकी रचनाओं का आकाशवाणी से भी प्रसारण हुआ। भावी पत्रकारों के मार्गदर्शन हेतु आपने कोटा खुला विश्वविद्यालय में पत्रकारिता प्रशिक्षक के रूप में अध्यापन किया।
सामाजिक क्षेत्र में भी आपका योगदान उल्लेखनीय रहा है। आप छात्रसंघ अध्यक्ष, हाड़ौती की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था भारतेंदु समिति के प्रधानमंत्री तथा प्रेस क्लब कोटा के सचिव रहे। शिक्षा के प्रसार हेतु मदर टेरेसा के नाम से विद्यालय संचालन और खुले पुस्तकालय जैसी अभिनव पहलें आपके सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करती हैं।
पत्रकारिता का विस्तृत अनुभव
—पत्रकार के रूप में नवभारत टाइम्स और जनसत्ता में लगभग तीन दशकों तक रिपोर्टिंग की।
—कुछ समय आउटलुक पत्रिका से भी जुड़े रहे।
—हैदराबाद में देश के पहले बहुभाषी पोर्टल में फ़ीचर संपादक के रूप में सेवाएँ दीं।
सामाजिक और संस्थागत भूमिका
—बहुमुखी प्रतिभा के धनी पंचोली जी कॉलेज जीवन में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
—कोटा की प्रमुख साहित्यिक संस्था “भारतेंदु समिति” में प्रधानमंत्री पद का दायित्व निभाया।
—आप प्रेस क्लब कोटा के सचिव भी रहे।
—शिक्षा का अलख जगाने के लिए आपने मदर टेरेसा के नाम पर एक विद्यालय का संचालन किया।
—अपने घर के सामने के पार्क में नवाचार करते हुए आपने खुला पुस्तकालय प्रारंभ किया, जिससे बच्चों और आमजन में पढ़ने की संस्कृति को नई दिशा मिली।

















