कांग्रेस में समय से पहले ‘ढोल पीटने’ की राजनीति क्यों पड़ रही भारी?

whatsapp image 2026 05 18 at 08.12.03
photo courtesy social media

-राहुल गांधी की बात जनता तक पहुंचाने के बजाय बयानबाजी में उलझे नेता, संगठनात्मक कमजोरी पर उठ रहे सवाल

-देवेंद्र यादव-

devendra yadav
देवेन्द्र यादव

कांग्रेस और उसके नेता Rahul Gandhi अपने मिशन चुनावी फतह में सफल क्यों नहीं हो पा रहे हैं? इसकी एक बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि कांग्रेस के भीतर बड़े पदों पर बैठे नेता सफलता मिलने से पहले ही सार्वजनिक रूप से ढोल पीटना शुरू कर देते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी भारतीय जनता पार्टी सतर्क हो जाती है और कांग्रेस कई बार जीती हुई बाजी हार जाती है।

कांग्रेस नेता और रेवंत रेड्डी ने बयान दिया है कि 2029 में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का चेहरा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए राहुल गांधी को मना लिया गया है। रेवंत रेड्डी के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों और मीडिया में चर्चा तेज हो गई।

भाजपा के नेता भी यह कहते नजर आने लगे कि यदि राहुल गांधी 2029 में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनते हैं तो इससे भाजपा को फायदा होगा। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है, लेकिन राजनीतिक तौर पर यह माना जाता रहा है कि यदि केंद्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों की सरकार बनती है तो प्रधानमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार राहुल गांधी ही होंगे।

ऐसे में लोकसभा चुनाव से करीब तीन साल पहले रेवंत रेड्डी का यह कहना कि 2029 में प्रधानमंत्री पद का चेहरा राहुल गांधी होंगे और इसके लिए उन्हें मना लिया गया है, राजनीतिक रूप से जल्दबाजी माना जा सकता है।

अब देश का एक बड़ा बुद्धिजीवी वर्ग और आम जनता भी यह मानने लगी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकल्प राहुल गांधी हैं और भाजपा का विकल्प कांग्रेस है। यही कारण है कि जनता की राय अधिक मायने रखती है, न कि कांग्रेस नेताओं की समय से पहले की गई बयानबाजी।

राहुल गांधी को जनता के भरोसे और विश्वास पर अधिक ध्यान देना चाहिए, न कि कांग्रेस के भीतर बैठे उन नेताओं पर जो समय से पहले ढोल पीटने लगते हैं। उन्हें यह भी समझना होगा कि कांग्रेस में ऐसे नेताओं की संख्या कम नहीं है और उनकी बयानबाजी से पार्टी को लगातार नुकसान हो रहा है।

मैंने पहले भी अपने ब्लॉग में लिखा था कि कांग्रेस के कुछ नेता और रणनीतिकार पार्टी की गुप्त योजनाओं को भी सार्वजनिक कर देते हैं। इससे भाजपा और उसके रणनीतिकार सतर्क हो जाते हैं और कांग्रेस को हराने की रणनीति बनाने लगते हैं, जिसमें भाजपा कई बार सफल भी हो जाती है।

अब यह भी सुनने में आ रहा है कि जून महीने में राजस्थान में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों का आठ दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित होगा। इसमें क्या होगा और किस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसकी खबरें भी संभवतः आने वाले दिनों में मीडिया में आ जाएंगी, क्योंकि कांग्रेस नेताओं की पुरानी आदत सार्वजनिक बयानबाजी की रही है।

आज भी राहुल गांधी सत्ताधारी भाजपा की नीतियों के खिलाफ लगभग अकेले संघर्ष करते नजर आते हैं। उनकी बात देश की आम जनता और युवाओं तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि कांग्रेस के भीतर ढोल पीटने वाले नेताओं की संख्या ज्यादा है, जबकि राहुल गांधी की बात जनता तक पहुंचाने वाले नेताओं की संख्या कम दिखाई देती है।

कांग्रेस में प्रशिक्षण विभाग अलग से मौजूद है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह विभाग कार्यकर्ताओं और नेताओं को यह प्रशिक्षण देता है कि वे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खडगे की बातों को आम जनता तक प्रभावी तरीके से पहुंचाएं? क्या कांग्रेस की जनहितकारी योजनाओं और विचारों को लोगों तक ले जाने की तैयारी हो रही है?

यदि यह सब केवल एक-दो दिन के प्रशिक्षण शिविरों तक सीमित रह जाता है, तो फिर यह केवल पैसे की बर्बादी बनकर रह जाता है और परिणाम शून्य दिखाई देते हैं। शायद यही वजह है कि आज भी राहुल गांधी की बातें जनता तक पूरी ताकत और स्पष्टता के साथ नहीं पहुंच पा रही हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

Advertisement
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments