
17 जून को कोटा से शुरू होने वाला राहुल गांधी का अभियान केवल शिक्षा और परीक्षा प्रणाली के मुद्दों तक सीमित नहीं दिखाई देता। इसमें युवाओं, शिक्षा, भाजपा विरोधी राजनीति, हाड़ौती की राजनीतिक प्रतीकात्मकता और लोकसभा अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र से संदेश देने जैसी कई परतें शामिल हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने अपने इस राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान की शुरुआत के लिए कोटा को चुना है।
भाजपा के खिलाफ देशव्यापी अभियान का आगाज़ कोटा से क्यों?
देवेन्द्र यादव
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 17 जून को शिक्षा नगरी कोटा से भारतीय जनता पार्टी की नीतियों के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का आगाज़ करने जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस और राहुल गांधी ने इस अभियान की शुरुआत के लिए कोटा को ही क्यों चुना?
कोटा देश की कोचिंग राजधानी के रूप में जाना जाता है। यहां हर वर्ष नीट, आईआईटी-जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर से लाखों छात्र-छात्राएं आते हैं। हाल ही में नीट परीक्षा को लेकर पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार को घेर रही है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। ऐसे में शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दे पर राष्ट्रीय आंदोलन की शुरुआत के लिए कोटा एक स्वाभाविक राजनीतिक मंच बनकर उभरा है।

आंदोलनों की धरती रहा है हाड़ौती
कोटा संभाग का आंदोलनों और जनसंघर्षों का अपना ऐतिहासिक महत्व रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यहां के स्वतंत्रता सेनानियों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। हाड़ौती क्षेत्र में जन आंदोलनों की मजबूत परंपरा रही है और आज भी यहां राजनीतिक चेतना अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देती है।
राजनीतिक दृष्टि से भी हाड़ौती लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ओम बिरला लगातार तीसरी बार कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बने हैं। ऐसे में भाजपा के मजबूत राजनीतिक क्षेत्र से कांग्रेस का आंदोलन शुरू करना अपने आप में एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
कांग्रेस के लिए भी शुभ संकेतों की धरती
कोटा संभाग कांग्रेस के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। कांग्रेस नेताओं का मानना रहा है कि जब भी पार्टी राजस्थान में सत्ता से बाहर होती है, तब सत्ता में वापसी के अभियान को गति देने में हाड़ौती की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। छात्र राजनीति के लिहाज से भी कोटा और हाड़ौती की पहचान अलग रही है। यहां से निकले कई छात्र नेता राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित हुए हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला स्वयं छात्र राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पदों तक पहुंचे हैं।
भारत जोड़ो यात्रा से भी जुड़ा है कोटा का राजनीतिक रिश्ता
राहुल गांधी और कोटा के बीच राजनीतिक जुड़ाव पहले भी दिखाई दे चुका है। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जब यात्रा कोटा से गुजरी थी, तब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उनका स्वागत किया था। राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित भी किया था और शिक्षा, रोजगार तथा युवाओं के मुद्दों पर अपनी बात रखी थी।
इसके अलावा 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान भी राहुल गांधी कोटा आए थे और चुनावी सभाओं को संबोधित किया था। उस चुनाव में कांग्रेस ने राजस्थान में सरकार बनाई। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने राजस्थान में उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नौ सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की। कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि कोटा से जुड़े राहुल गांधी के राजनीतिक अभियान पार्टी के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आए हैं।
राजनीतिक संदेश?
राहुल गांधी के कोटा चयन के पीछे एक और राजनीतिक संदेश भी देखा जा रहा है। संसद के भीतर राहुल गांधी कई बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया जाता। जुलाई में संसद का वर्षाकालीन सत्र शुरू होने वाला है और उससे पहले वे उसी संसदीय क्षेत्र से भाजपा के खिलाफ आंदोलन का शंखनाद करने जा रहे हैं, जिसका प्रतिनिधित्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला करते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह केवल एक आंदोलन की शुरुआत नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक राजनीतिक संदेश भी है। संभव है कि राहुल गांधी कोटा की धरती से उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाएं, जिन्हें लेकर वे संसद के भीतर अपनी आवाज दबाए जाने की शिकायत करते रहे हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेख लेखक के निजी विचार हैं।)

















