
-डॉ हेमा पाण्डेय-
(लेखिका पूर्व प्राध्यापिका एंव मोटिवेशन स्पीकर हैं)
भाषा अपनी बात को सहज रूप से लोगों तक पहुँचाने का माध्यम है। निज भाषा का प्रयोग न सिर्फ हमें अपनी जड़ों से ज्यादा जोड़े रखता है। अपितु ज्ञान की किसी भी विधा में हमें प्रवीण बनाता है। भाषा का कार्य सिर्फ विचारों का आदान प्रदान ही नहीं वरन भाषा किसी भी समाज की नैतिकता और संस्कारों की सबसे सशक्त वाहक हिती है। अपनी मातृ भाषा से कटते ही हम अपने संस्कारों और परम्पराओं से भी कटने लगते हैं। आज अंग्रेजी का प्रभाव कुछ ज्यादा ही दिखता है पर इसे लेकर असहज होने की जरूरत नहीं। धीरे-धीरे हिंदी अपनी जगह औऱ प्रभाव बढ़ा रही है इसलिए बेझिझक हिंदी बोलिये।

हिंदी पट्टी का 400 वर्षाे पुराना शानदार इतिहास
मालवा की महारानी अहिल्या बाई का चेहरा है जो पेशवाओं के उत्पीड़न से बचाने के लिए हजारों मुस्लिम जुलाहों के परिवारों को माहेश्वर लाई उनके लिए मस्जिदें बनवाई उनकी बनी साडियों के लिये बाजार खुलवाए। उनकी बेटियों की शादियां करवाई। इसके पीछे बुन्देलखण्ड की महारानी का चेहरा है। जिन्होंने तोपची पठान गौस खां को बेटे से बढ़कर माना। इस तथाकथित धर्मांध काऊ बैल्ट में धर्मनिरपेक्ष न्याय की ऐसी परम्परा थी कि जब हनुमान गढ़ी पर मुल्लाओं और काजियों ने जबरदस्ती कब्जा कर लिया था। तब अवध के मुस्लिम नवाब ने सेना भेजी कि हनुमान गढ़ी को मुल्लाओं से मुक्त कराकर हिदू वैरागियों को सौप दिया जाय।
परंपरा के पीछे इस प्रदेश के महाकवियों की वाणी
इस परंपरा के पीछे इस प्रदेश के महाकवियों की वाणी है। रामायण के अमर गायक तुलसी दास जिन्होंने काशी के कुछ कट्टर पंडितों की निंदा आलोचना से झुब्ध होकर लिखा था। मुझे कोई कुछ भी कहे, मुझे क्या करना, माँगकर खाऊंगा मस्जिद में जाकर सो रहूँगा, न किसी के लेने में न किसी के देने में। मस्जिद पराई नहीं थी तुलसीदास के लिए, नहीं मुस्लिम होने की बिना पर अल्लाउद्दीन अपना था मालिक मोहम्मद जायसी के लिए। अपनी पद्मावत में चित्तौड़ पर हमला करने वाले मुस्लिम सुल्तान अल्लाउद्दीन को जायसी ने अल्लाउद्दीन सैतानू घोषित किया।
मजहब कोई भी हो, असली धर्म प्यार है
इस प्रदेश के सूफी सन्तों फकीरों ने बार-बार कहा कि राम और रहीम के बंदों में कोई फर्क नहीं। हमारा असली चेहरा यही है जिसका मजहब कोई भी हो, जिसका असली धर्म प्यार है, निश्छल प्यार, उदारता, दिली भाई चारा। सदियों की इस आध्यात्म समृद्ध मानव प्रेमी परम्परा ने विरासत में हिंदी प्रदेश को ये गहरी उदारवादी मानसिकता दी।
हिंदी में निसंकोच बात करके देखिए
फिल्म इंग्लिश विंग्लिश में शशी गोडबोले जब भतीजी की शादी में न्यूयॉर्क जाने के लिए हवाई जहाज पर बैठती है तो अंग्रेजी न बोल पाने का ग्लानि का भाव चरम पर पहुंच जाता है, लेकिन तभी बगल में बैठा सहयात्री अभिताभ् बच्चन शशी गोडबोले के भय को यह कहकर क्षण में खत्म कर देता है कि बेशक, बेझिझक, बिंदास हिंदी बोलिये। आप भले हवाई जहाज या राजधानी एक्सप्रेस में यात्रा कर रहें हो अपने सह यात्रियों से हिंदी में नि:संकोच बात करके देखिए। आपका खुद से ओढा हुआ अकेलापन छूमंतर हो जाएगा। आपका सफर ज्यादा सुहाना और मजेदार हो जाएगा। आपके यात्रा जन्य अनुभव भी इंद्र धनुषी और विविध धर्मी हो जाएगें। इस लिए इंग्लिश विंग्लिश नही, बेशक, बेझिझक, बिंदास हिंदी बोलिये।

















