
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर को 25 आधार अंकों से बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार (8 फरवरी) को यह घोषणा की। आरबीआई ने पिछले साल मई से रेपो दर में संचयी 250 आधार अंकों की वृद्धि की थी।
दास ने एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि “25 आधार अंकों की दर वृद्धि इस समय उचित मानी जाती है। मौद्रिक नीति चुस्त और मुद्रास्फीति के प्रति सतर्क रहेगी।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि विश्व अर्थव्यवस्था अब इतनी गंभीर नहीं दिख रही है और मुद्रास्फीति भी कम होती दिख रही है। उन्होंने कहा, “आरबीआई की एमपीसी ने उदार नीति को वापस लेने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 4ः2 वोट का फैसला किया।“ आरबीआई ने 2023-24 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि 6.4 प्रतिशत रहने का भी अनुमान लगाया है।
भारत की खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2022 में गिरकर 5.72% हो गई, लेकिन अब भी यह आरबीआई के वांछित स्तर से ऊपर है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि कि नवीनतम आंकड़े पिछले महीने की तुलना में खुदरा मुद्रास्फीति में मामूली गिरावट और आगे के मॉडरेशन को दर्शाते हैं। इसी प्रवृति को ध्यान में रखते हुए महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला किया है। एमपीसी ने समीक्षा बैठक में रेपो रेट में इजाफा किया है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि 2022-23 की दूसरी छमाही में चालू खाते का घाटा कम होगा और प्रबंधनीय बना रहेगा।
केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी का यह फैसला आपकी मासिक ईएमआई को प्रभावित करेगा। एसडीएफ (स्थायी जमा सुविधा) दर को 6% से 6.25% तक समायोजित करने की बात कही गई है। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी) की दरें 25 बीपीएस से बढ़कर 6.75% हो गईं।

















