-Sugyata सुजाता गुप्ता-

बेटियों को जीवन के
सबसे गहन और सबसे गूढ़ सबक
माँओं ने उनकी चुटिया बनाते वक्त ही दिए !
चुटिया बनाते बनाते माँ के हाथों की
उनके बालों पर पकड़
तब और कस जाती जब वे
दूसरे के घर जाना है
उस घर जाकर क्या करना,
कैसे रहना, क्या न पहरना
लोक-लाज, शरम-हया ,
चरितर, इज्जत, महीने के दिन
समझाती बुझाती !
उनकी उँगलियों की यही पकड़
तब एकदम ढीली पड़
हमारे बालों को सहलाने लगती
जब सावन में वे
अपनी अम्मा के घर जाने की बात करती,
बचपन से उनके पिता उनकी
कैसे कैसे जिद पूरी करा करते,
सावन के झूले और नीम की निंबोली की बात करती,
बचपन वाली सहेली संग खेली होली की बात करती
बागीचे की अलसाई दोपहरी की बात करती !
अम्मा से अपनी चुटिया बनवाते
उनकी उँगलियों की उस पकड़ के
कसाव और ढिलाव को
उनकी सी ही उम्र पर अब आकर समझा,
कि वह स्त्रियों के जीवन पर
दुनिया की पकड़ और ढील मापने का
सबसे विश्वसनीय पैमाना था!
सुजाता गुप्ता

















