-अखिलेश कुमार-

(फोटो जर्नलिस्ट)
कोटा। प्रख्यात लेखक मुंशी प्रेमचंद की पूस की रात कहानी जिसने भी पढी है वह न केवल उनकी लेखनी का कायल हुआ बल्कि भारतीय ग्रामीण जन जीवन और मेहनतकश किसान के जीवन के मार्मिक पहलुओं से भी अवगत हुआ।

इन दिनों पूस यानी पौष माह है। हालांकि इस बार हाड कंपाती सर्दी का तो असर नहीं है लेकिन सुबह कोहरे का असर साफ देखा जा सकता है। ऐसे ही अवसर पर फोटो जर्नलिस्ट अखिलेश कुमार ने कुछ दर्शनीय फोटोग्राफ लिए हैं।

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