क्या राहुल गांधी 21 वर्ष के युवाओं को चुनाव लड़ने का अधिकार देने की तैयारी में हैं!

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photo courtesy social media

रेवंथ रेड्डी के बयान से कांग्रेस की भावी राजनीतिक रणनीति पर बढ़ी चर्चा

-देवेन्द्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी ने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की भविष्य की राजनीतिक रणनीति और मंशा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। राहुल गांधी के पिता, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने 18 वर्ष के युवाओं को मतदान का अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक फैसला किया था। अब यदि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो क्या वे चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर देंगे? रेवंथ रेड्डी के बयान के बाद यही सवाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था और राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने 21वीं सदी के भारत का सपना देखा था और देश का भविष्य युवाओं में तलाशा था। इसी सोच के तहत उन्होंने मतदान की आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी।

यदि 2029 में कांग्रेस केंद्र की सत्ता में वापसी करती है और राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो क्या वे चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष कर देंगे? क्या राहुल गांधी के मन की बात का संकेत उनके भरोसेमंद मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी ने दे दिया है? और क्या ऐसा बदलाव केवल चुनावी व्यवस्था तक सीमित रहेगा या कांग्रेस संगठन में भी दिखाई देगा?

संगठन की बात करें तो राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान के माध्यम से देशभर में जिन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कराई है, उनमें बड़ी संख्या युवाओं की है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के संगठन में नीचे से लेकर ऊपर तक युवाओं की भागीदारी और बढ़ेगी?

रेवंथ रेड्डी के बयान के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की चिंता बढ़ सकती है। यदि ऐसा बदलाव होता है तो वह केवल चुनाव लड़ने की आयु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संगठन और सरकार, दोनों में युवाओं की भूमिका बढ़ती हुई दिखाई दे सकती है।

यही कारण है कि अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या राहुल गांधी कांग्रेस संगठन में बड़ा बदलाव कर अपने अनुकूल नई टीम तैयार करेंगे? लंबे समय से कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक बदलाव की चर्चा होती रही है। रेवंथ रेड्डी के बयान से यह संकेत मिलता है कि राहुल गांधी युवाओं की नई टीम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।

एक समय राजीव गांधी ने भी सत्ता और संगठन में युवाओं को आगे लाने का प्रयास किया था। राजनीति में युवाओं की बड़ी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में उनका पहला बड़ा कदम 18 वर्ष के युवाओं को मतदान का अधिकार दिलाना था। हालांकि, इस फैसले का राजनीतिक लाभ कांग्रेस को नहीं मिला। 1989 के आम चुनाव के बाद कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई और युवा भारत का उनका सपना अधूरा रह गया।

राजीव गांधी और राहुल गांधी के दौर में सबसे बड़ा अंतर यह है कि राजीव गांधी ने यह फैसला तब लिया था, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और वे स्वयं प्रधानमंत्री थे। जबकि वर्तमान में कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर है। ऐसे में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी यह वादा कर रहे हैं कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है और राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनते हैं, तो 21 वर्ष के युवाओं को चुनाव लड़ने का अधिकार दिया जाएगा।

यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। इससे युवाओं की सत्ता और संगठन, दोनों में भागीदारी बढ़ सकती है।

अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी वास्तव में देश की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव की दिशा में बढ़ रहे हैं? क्या वे राजीव गांधी के अधूरे सपने को साकार करना चाहते हैं? राजीव गांधी ने 1985 में 21वीं सदी के भारत का सपना देखा था। क्या राहुल गांधी उसी सोच को नए रूप में आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं?

राहुल गांधी हाल के वर्षों में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर संसद से लेकर सड़क तक सक्रिय दिखाई दिए हैं। इससे यह धारणा मजबूत हुई है कि वे युवाओं को राजनीति और शासन में अधिक अवसर देने के पक्षधर हैं। यही कारण है कि युवाओं और छात्रों के बीच उनके प्रति विश्वास पहले की तुलना में बढ़ता हुआ दिखाई देता है।

हालांकि, चुनौती कम नहीं है। क्या कांग्रेस के भीतर लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभा रहे वरिष्ठ नेता इस बदलाव को सहजता से स्वीकार करेंगे? राहुल गांधी को राजीव गांधी के दौर से भी सीख लेनी होगी। उस समय भी सत्ता और संगठन में जमे कई नेताओं को राजीव गांधी की युवा नीति रास नहीं आई थी और कुछ वर्षों बाद कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई।

यह भी कहा जाता है कि 18 वर्ष की आयु में मतदान का अधिकार मिलने के बाद सबसे अधिक राजनीतिक लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिला। ऐसे में यदि राहुल गांधी 21 वर्ष के युवाओं को चुनाव लड़ने का अधिकार देने का वादा करते हैं, तो क्या यह कांग्रेस की सत्ता में वापसी का आधार बनेगा? इसका जवाब भविष्य और जनता का जनादेश ही देगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेख उनके निजी विचार हैं।)

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