
-अंतिम दिन भी टकराव के आसार, सत्र बढ़ाने को लेकर भी उठे सवाल
-देवेन्द्र यादव-

क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के लेटर वार के बीच संसद का मानसून सत्र सुचारू रूप से चलेगा? 20 जुलाई से शुरू हुआ मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो जाएगा। क्या पक्ष-विपक्ष की लेटरबाजी को ध्यान में रखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सत्र को कुछ समय के लिए आगे बढ़ा देंगे? ये तमाम सवाल हैं, जिनका जवाब आज चंद घंटों में देश को मिल जाएगा, क्योंकि आज 13 अगस्त को संसद का मानसून सत्र समाप्त होने वाला है।
11 अगस्त को कांग्रेस सांसद और कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की थी कि गृहमंत्री अमित शाह सदन में आकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में आकर 12 अगस्त को जवाब तो नहीं दिया, लेकिन शायद केसी वेणुगोपाल के पत्र का जवाब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर दिया कि वह संसद में आकर विपक्ष के तमाम सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
अमित शाह ने संसद परिसर में प्रेस के सामने आकर वक्तव्य दिया कि वह विपक्ष के तमाम सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमित शाह के वक्तव्य पर कहा कि विपक्ष सदन में अमित शाह का भाषण सुनना नहीं चाहता है। विपक्ष अमित शाह से सीधा जवाब चाहता है कि जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारी छात्रों पर बल प्रयोग किसके आदेश पर किया गया और क्यों किया गया?
मानसून सत्र के अंतिम दिन 13 अगस्त को देखना होगा कि संसद का मानसून सत्र पक्ष और विपक्ष के लेटर वार के बाद समाप्त हो जाएगा या फिर संसद सत्र की अवधि कुछ समय के लिए बढ़ा दी जाएगी।
जंतर-मंतर पर छात्रों पर बल प्रयोग और अयोध्या की चोरी पर जवाब की मांग
विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि अमित शाह और सरकार सदन के भीतर आकर जवाब दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनकारी छात्रों पर बल प्रयोग किसने किया और क्यों किया। वहीं विपक्ष की दूसरी मांग अयोध्या के राम मंदिर में हुई चोरी को लेकर भी है। विपक्ष सत्ता पक्ष भाजपा से सदन में इस मामले पर जवाब चाहता है। क्या संसद सत्र के अंतिम दिन विपक्ष को उनके सवालों का जवाब मिलेगा?
यह बड़ा प्रश्न है, जिसके जवाब के लिए चंद घंटे और इंतजार करना होगा। इंतजार इस बात का भी है कि सत्ता पक्ष मानसून सत्र में किन-किन विधेयकों को पारित कराने में सफल हुआ। क्योंकि अभी तक देखा गया है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के टकराव के बावजूद अनेक विधेयक संसद में पारित करवा लिए हैं। क्या सत्र के अंतिम दिन ऐसा एक बार फिर नजर आएगा? इस पर सभी की नजर है।
खास बात यह है कि इस बार तमाम विपक्ष लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में एकजुट नजर आ रहा है और मुस्तैद भी है। इसलिए अन्य सत्रों की तरह इस बार सत्ता पक्ष के लिए विधेयक पारित कराना उतना आसान नहीं है, जितना पूर्व में हुआ था।
संसद के बाद क्या होगी राहुल गांधी की रणनीति?
लेकिन सवाल यह भी है कि विपक्ष यदि संसद से अपने सवालों का जवाब लिए बगैर निकलता है तो संसद सत्र की समाप्ति के बाद विपक्ष आगे क्या करेगा? यह देखना होगा। क्योंकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी देश के युवा और छात्रों की आवाज को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के नाम पर उठा रहे हैं। क्या संसद सत्र के बाद राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ गांव-गांव में सुनाई देगी?
शायद कांग्रेस ने इसकी तैयारी पहले से कर ली है। 11 अगस्त को बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव सहित कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष, युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और छात्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिल्ली में बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं कि वे छात्र और युवाओं की समस्याओं को लेकर देशभर में जाएंगे और छात्रों तथा युवाओं को उनका हक और अधिकार दिलाएंगे।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को कोटा, देहरादून और प्रयागराज में बड़ी सफलता मिली है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस सफलता को राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तरह आगे बढ़ाएगी?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

















