
-देवेन्द्र यादव-

राजस्थान के पुष्कर जी में कांग्रेस के राजस्थान और दिल्ली प्रदेश के जिला अध्यक्षों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘संगठन सृजन’ के तहत राजस्थान और दिल्ली में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई थी। अब कांग्रेस अपने नवनियुक्त जिला अध्यक्षों को प्रशिक्षित करने के लिए विभिन्न राज्यों में प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रही है। इसी क्रम में इन दिनों राजस्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पुष्कर जी में जिला अध्यक्षों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
क्या प्रशिक्षण से मजबूत होगी कांग्रेस?
कांग्रेस लंबे समय से केंद्र और कई राज्यों की सत्ता से बाहर है। देश के अनेक राज्यों में पार्टी की स्थिति बेहद कमजोर दिखाई देती है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में कांग्रेस का कैडर या तो नजर नहीं आता या फिर बहुत कमजोर है। इन राज्यों में कांग्रेस एक-एक सीट जीतने के लिए संघर्ष करती नजर आती है, लेकिन इसके बावजूद सफलता सीमित ही रहती है।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या केवल प्रशिक्षण देकर कांग्रेस मजबूत हो जाएगी? क्या प्रशिक्षण शिविर में जो बातें सिखाई जा रही हैं, वे जमीन पर भी लागू होंगी? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कई जिला अध्यक्ष हाईकमान के प्रति कम और राज्यों के प्रभावशाली नेताओं के प्रति अधिक वफादार दिखाई देते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस संगठन अक्सर कमजोर नजर आता है और चुनावी हार का सामना करता है। क्या प्रशिक्षण में यह भी बताया जाएगा कि जिला अध्यक्ष किसी व्यक्ति विशेष के बजाय कांग्रेस संगठन और हाईकमान के प्रति वफादार रहें?
कांग्रेस में प्रशिक्षण की परंपरा नई नहीं
कांग्रेस के भीतर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने की परंपरा कोई नई बात नहीं है। यदि राहुल गांधी को पार्टी के रणनीतिकारों ने यह समझाया है कि नेताओं को प्रशिक्षण देने से कांग्रेस मजबूत होगी और चुनावी जीत हासिल करेगी, तो उन्हें यह भी समझना चाहिए कि कांग्रेस के भीतर सबसे प्रशिक्षित कार्यकर्ता कांग्रेस सेवा दल में मौजूद हैं।
देशभर में कांग्रेस सेवा दल के लाखों प्रशिक्षित कार्यकर्ता पार्टी के प्रति ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मुख्य संगठन और सत्ता में बहुत कम स्थान मिलता है। इसका उदाहरण कांग्रेस द्वारा नियुक्त जिला अध्यक्षों की सूची में देखा जा सकता है।
सवाल यह है कि संगठन सृजन कार्यक्रम के तहत कांग्रेस ने कितने सेवा दल कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष बनाया? जबकि यदि कांग्रेस में ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ प्रशिक्षित कार्यकर्ता मौजूद हैं, तो वे सेवा दल के ही कार्यकर्ता हैं, जो उपेक्षा के बावजूद दिन-रात पार्टी के लिए काम करते हैं।
सेवादल की उपेक्षा क्यों?
कांग्रेस में सत्ता और संगठन के भीतर युवक कांग्रेस, छात्र कांग्रेस और महिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को बड़े पद मिल जाते हैं। उन्हें विधानसभा और लोकसभा के टिकट भी दिए जाते हैं, लेकिन कांग्रेस सेवा दल के ईमानदार, वफादार और कर्मठ कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा देखी जा सकती है। यदि कांग्रेस वास्तव में प्रशिक्षण के माध्यम से संगठन को मजबूत करना चाहती है, तो राहुल गांधी को देशभर में सेवा दल के प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष और प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान देना चाहिए।
रणनीतिकारों पर भी उठते हैं सवाल
एक बड़ा सवाल यह भी है कि देशभर में कांग्रेस ने जिन जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की है, उनमें कई ऐसे हैं जो दूसरी बार जिला अध्यक्ष बने हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य रह चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जो नेता पहले से इतने अनुभवी हैं, वे आखिर प्रशिक्षण में क्या सीखेंगे और अपने जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं को क्या नया सिखाएंगे? मैं बार-बार अपने ब्लॉग में लिख रहा हूं कि राहुल गांधी को कांग्रेस के खजाने को बर्बाद करने वाले रणनीतिकारों से सावधान रहना चाहिए। उन्हें यह भी पूछना चाहिए कि प्रशिक्षण की रणनीति बनाने वाले लोग स्वयं कितने प्रशिक्षित हैं। क्योंकि जिन जिला अध्यक्षों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उनमें कई वरिष्ठ नेता ऐसे हैं जो विधानसभा और लोकसभा के चुनाव लड़ चुके हैं और लंबे राजनीतिक अनुभव रखते हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

















