केरल-असम चुनाव परिणाम तय करेंगे पायलट और शिवकुमार का राजनीतिक भविष्य

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photo courtesy social media
केरल और असम के चुनाव परिणाम कांग्रेस के दो उभरते चेहरों सचिन पायलट और डी.के. शिवकुमार के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं। इन राज्यों में मिली सफलता या असफलता न केवल उनकी नेतृत्व क्षमता की परीक्षा होगी, बल्कि राजस्थान और कर्नाटक में उनके मुख्यमंत्री पद के दावों को भी मजबूती या झटका दे सकती है।

-देवेन्द्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

केरल और असम के विधानसभा चुनाव परिणाम कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं सचिन पायलट और डी के शिवकुमार के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उत्तर और दक्षिण भारत के ये दोनों नेता इस समय अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सचिन पायलट केरल चुनाव में कांग्रेस के मुख्य पर्यवेक्षक हैं, जबकि डी.के. शिवकुमार असम चुनाव में यही भूमिका निभा रहे हैं। दोनों ही नेता अपने-अपने राज्योंराजस्थान और कर्नाटक में लंबे समय से मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं।
दिलचस्प बात यह है कि दोनों के सामने अपने-अपने राज्यों में समान प्रकार की राजनीतिक चुनौतियाँ हैं। राजस्थान में सचिन पायलट के सामने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में मौजूद हैं, वहीं कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के सामने वर्तमान मुख्यमंत्री सिदृधारमैया बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, ने इन दोनों नेताओं को केरल और असम विधानसभा चुनावों में मुख्य पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। ऐसे में इन चुनावों के परिणाम उनके नेतृत्व कौशल और राजनीतिक क्षमता की अहम परीक्षा माने जा रहे हैं।
केरल और असम दोनों राज्यों में कांग्रेस की वापसी की संभावनाएँ जताई जा रही हैं। यदि पार्टी इन राज्यों में सत्ता हासिल करती है, तो भविष्य में राजस्थान और कर्नाटक के विधानसभा चुनावों में सचिन पायलट और डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में उभर सकते हैं।
विशेष रूप से केरल में जीत सचिन पायलट के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। इससे पहले अशोक गहलोत को कई राज्यों में चुनावी जिम्मेदारी दी गई, लेकिन उन चुनावों में कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में यदि पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस केरल में वापसी करती है, तो यह उनके राजनीतिक कद को मजबूत कर सकता है।
असम की बात करें तो राज्य में पिछले एक दशक से कांग्रेस सत्ता से बाहर है। हालांकि,गौरव गोगोई के नेतृत्व में संगठन पहले की तुलना में अधिक सक्रिय और मजबूत नजर आ रहा है। प्रियंका गांधी (स्क्रीनिंग कमेटी अध्यक्ष) और डी.के. शिवकुमार (मुख्य पर्यवेक्षक) की भूमिका ने भी पार्टी को मजबूती दी है।
राजस्थान के वरिष्ठ नेता भंवर जितेन्द्र सिंह असम कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में सक्रिय हैं और उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए कई नेताओं को जोड़ा है। साथ ही, असम में बसे मारवाड़ी समुदाय को साधने की रणनीति भी कांग्रेस अपना रही है।
कुल मिलाकर, केरल और असम के चुनाव परिणाम न सिर्फ इन राज्यों की राजनीति, बल्कि राजस्थान और कर्नाटक की कांग्रेस इकाइयों के भविष्य पर भी असर डाल सकते हैं। इन परिणामों पर दोनों राज्यों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की नजरें टिकी रहेंगी।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या कांग्रेस इन दोनों राज्यों में सत्ता में वापसी कर पाएगी? और अगर ऐसा होता है, तो क्या राजस्थान में सचिन पायलट और कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार को नेतृत्व की कमान सौंपी जाएगी? इन सवालों के जवाब चुनाव परिणामों के साथ ही साफ होंगे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

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