-ए एच जैदी-
(नेचर प्रमोटर)

कोटा। अफ्रीका से आज भारत में चीते का आगमन हो गया। भारत समेत एशिया से लुप्त हो गए इस वन्य जीव के प्रति सभी को उत्सुकता थी और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व से जुड़े लोग और वन्य जीव प्रेमी भी उम्मीद बांधे थे कि शायद यहां भी इनमें से कुछ चीते छोड़े जाएं। लेकिन विविध कारणों से यह संभव नहीं हुआ। जबकि वन्य जीव प्रेमियों और विशेषज्ञों का मानना था कि हाडोती के जंगल भी चीता को बसाने के लए मुफीद हैं।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि अगले 5 साल में 50 चीता भारत लाए लाएंगे। ऐसे में हमें उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारा वन क्षेत्र चीता से आबाद हो सकता है क्योंकि उम्मीद पर दुनिया कायम है।
मध्य प्रदेश के कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में इन चीतों को बसाया जाएगा। यह क्षेत्र भी हाडोती के बारां जिले की सीमा के पास है। यदि कुनो-पालपुर राष्ट्रीय उद्यान में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं रहे तो ये इनमें से कुछ चीता बारां जिले में आ सकते हैं।

इसका उदाहरण 1935 में अफ्रिका से लाए गए शेर का है। ग्वालियर के महाराजा सिंधिया अफ्रीका से कुछ शेर लाए थे। इनमें से एक शेर पलायन कर शाहबाद के जंगलों में आ गया था। शाहबाद बारां जिले की सीमा पर है। एक समय यहाँ बहुत सघन जंगल था। उक्त शेर के भय से शाहाबाद और आसपास के गांव वालों ने घर से निकलना बंद कर दिया था। वे भय की वजह से खेती करने नहीं जा रहे थे। ग्रामीणों की शेर की वजह से परेशानी के बारे में कोटा दरबार को सूचित किया गया । आखिर दरबार का शिकार खाना मय लवाजमे के साथ शाहबाद के जंगल में पहुंचा और उक्त शेर को मारा। उस शेर की ट्रॉफी आज भी ब्रिलियड रूम में लगी है।

















