-सुलह की राह नहीं आ रही नजर
-द ओपिनियन-
एक बार पहले भी विभाजन का दंश झेल चुके अफ्रीकी देश सूडान में गृहयुद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं और वहां सेना व अर्धसैन्य बलों में टकराव जारी है। दोनों ही पक्ष देश की सत्ता पर कब्जा करना चाहते हैं। खूनी संघर्ष में 270 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें एक भारतीय भी शामिल है। भारत सरकार की चिंता वहां फंसे भारतीयों को निकालने को लेकर है। सरकार ने वहां रह रहे भारतीयों को घरों से बाहर न निकलने की भी सलाह दी है। सरकार वहां रह रहे भारतीयों को निकालने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। सूडान में सत्ता की बागडोर जनरल अब्देल फत्ताह बुरहान के हाथों में है। जबकि दूसरी ओर दूसरी ओर अर्धसैन्य बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेस (आरएसएफ) है। दोनों के बीच यह संघर्ष जारी है। आरएसएफ की कमान मोहम्म्द हमदान दागालो के हाथों में है। कभी दोनों जनरल एक साथ थे लेकिन अब आपस में संघर्ष में उलझे हैं। सेना ने साफ कर दिया है कि जब तक आरएसएफ को भंग नहीं कर दिया जाता तब तक आरएसएफ के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। वहीं आरएसएफ के जनरल दागालो ने जनरल बुरहान को अपराधी व झूठा कहा है। यानी दोनों पक्ष फिलहाल बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में संघर्ष के जल्द थमने के आसार नहीं है। सूडान पहले विभाजन का दर्द झेल चुका है। तब दक्षिणी सूडान अलग राष्ट्र बन गया था।
सूडान में संघर्ष का यूं तो काफी लम्बे समय से इतिहास रहा है। करीब तीन दशक तक देश के राष्ट्रपति रहे उमर अल बशीर को हटाने के लिए 2019 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सेना ने उनका तख्ता पलट कर दिया था। इसके बाद लोकतंत्र की बहाली के लिए नागरिकों ने अपना अभियान जारी रखा। 2021 में सेना ने सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। वर्तमान में सेना साॅवरेन काउंसिल के जरिए सूडान की सत्ता चला रही है। संघर्ष सेना व अर्धसैन्य बल के बीच चल रहा है।
फिलहाल संघर्ष के मूल में रैपिड सपोर्ट फोर्स के सेना में विलय के बाद बनने वाली नई सेना का नेतृत्व कौन करेगा इस पर सहमति नहीं बन पा रही आरपीएफ पर दारफुर में संघर्ष के दौरान लोगों पर अत्याचार करने के भी आरोप लगे थे।
कैसे बनी थी आरएसएफ
आरएसएफ की स्थापना बशीर ने दारफूर विद्रोहियों को कुचलने के लिए की थी और आरपीएफ पर स्थानीय लोगों पर अत्याचारों के आरोप भी खूब लगे हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति बशीर ने 2013 में जानजवीद को एक अर्द्धसैनिक बल में तब्दील कर दिया था। आरएसएफ और बुरहान समर्थित सेना ने ही मिलकर 2019 में बशीर को सत्ता से बाहर करने का काम किया था। शुरू में सेना ने लोकतांत्रिक सरकार बनने में सहयोग की बात की, लेकिन अक्टूबर 2021 में सेना ने सत्ता अपने हाथ ले ली।
भारत की चिंता
सूडान में करीब 3000 भारतीय फंसे होने की खबर है। इसी के साथ 1200 लोग ऐसे हैं, जो सूडान में 150 सालों से बसे हुए हैं। सरकार इन सब की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

















