
राजीव गांधी की टीम के पुराने साथी पर राहुल गांधी का भरोसा, 2029 की रणनीति से जोड़कर देखे जा रहे हैं फैसले
-देवेन्द्र यादव-

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव गुलाम अहमद मीर को राहुल गांधी ने तमिलनाडु और पुडुचेरी कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रभारी बनाकर यह संदेश दिया है कि कांग्रेस के प्रति निष्ठा और गांधी परिवार के प्रति वफादारी का सम्मान पार्टी में आज भी किया जाता है। राहुल गांधी ने उन नेताओं पर फिर से भरोसा जताना शुरू किया है, जिन्हें कभी स्वर्गीय राजीव गांधी ने तैयार किया था। उन्हीं नेताओं में एक नाम गुलाम अहमद मीर का भी है, जो जम्मू कश्मीर से आते हैं।
कांग्रेस के भीतर राजीव गांधी ने युवाओं की एक मजबूत टीम तैयार करने के लिए देशभर के जिलों में युवा समन्वयकों की नियुक्ति की थी। उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा और गुलाम अहमद मीर ने लंबे समय तक अमेठी और रायबरेली लोकसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के लिए काम किया।
राहुल गांधी ने किशोरी लाल शर्मा की निष्ठा और वफादारी का सम्मान उन्हें अमेठी से लोकसभा का टिकट देकर किया। वहीं गुलाम अहमद मीर को पहले कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया और अब 9 जुलाई को कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें तमिलनाडु और पुडुचेरी कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किया है।
गुलाम अहमद मीर जम्मू कश्मीर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह जम्मू कश्मीर के डूरू शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी हैं।
राहुल गांधी ने पहले अपने भरोसेमंद युवा सांसद मणिकम टैगोर को तमिलनाडु प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया। इसके बाद 9 जुलाई को गुलाम अहमद मीर को तमिलनाडु और पुडुचेरी का राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किया। मीर और टैगोर दोनों ही राहुल गांधी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। माना जा रहा है कि राहुल गांधी की नजर 2029 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर है।
वर्तमान में तमिलनाडु से कांग्रेस के नौ लोकसभा सांसद हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था और अच्छा प्रदर्शन किया था। इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं। फिल्म अभिनेता चंद्रशेखर जोसेफ विजय ने अपनी नई पार्टी टीवीके का गठन किया और उल्लेखनीय सफलता हासिल की। कांग्रेस ने विजय की पार्टी को समर्थन देकर सरकार बनाने में सहयोग किया। इससे डीएमके नेतृत्व की नाराजगी की भी चर्चा रही, क्योंकि लंबे समय से कांग्रेस और डीएमके सहयोगी रहे हैं।
ऐसे राजनीतिक माहौल में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस ने तमिलनाडु की जटिल परिस्थितियों को देखते हुए अनुभवी, परिपक्व और गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल गुलाम अहमद मीर को वहां का प्रभारी बनाया है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री विजय युवा हैं और पहली बार विधायक तथा मुख्यमंत्री बने हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर भी युवा नेता हैं। ऐसे में संगठन और गठबंधन की राजनीति को संतुलित करने के लिए एक अनुभवी नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की गई होगी, जिसे गुलाम अहमद मीर पूरा कर सकते हैं।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा और पार्टी ने नौ सीटों पर जीत दर्ज की। माना जाता है कि इस प्रदर्शन के पीछे राहुल गांधी के राजनीतिक सलाहकारों, युवा नेता मणिकम टैगोर और पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सेंथिल की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों ही वर्तमान में तमिलनाडु से लोकसभा सांसद हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी की नजर 2029 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की सभी 39 सीटों पर है। क्या इसी रणनीति के तहत उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद नेता गुलाम अहमद मीर को राष्ट्रीय प्रभारी और मणिकम टैगोर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजीव गांधी के भरोसेमंद नेता और राहुल गांधी के विश्वस्त सहयोगी मिलकर तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस के लिए कितना बड़ा बदलाव ला पाते हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

















