
झारखंड से प्रयागराज तक छात्र आंदोलनों के बीच उठे नए राजनीतिक सवाल
-देवेन्द्र यादव-

झारखंड में पेपर लीक मामले को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन करने का ऐलान कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने राजनीतिक विरोधियों को यह संदेश दिया है कि वह पूरी तरह देश के युवाओं और छात्रों के साथ खड़े हैं।
गत दिनों नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन हुआ था। आंदोलनकारी छात्रों पर हुए कथित दमन के विरोध में राहुल गांधी संसद से लेकर सड़क तक छात्रों और युवाओं के पक्ष में आवाज उठाते रहे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन तो समाप्त हो गया, लेकिन पेपर लीक के मुद्दे पर झारखंड के छात्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया।
झारखंड में कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ सरकार में शामिल है। इसलिए वहां के छात्र आंदोलन को लेकर सभी की नजर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर थी। राहुल गांधी ने गुरुवार, 6 अगस्त को एक वीडियो जारी कर कहा कि वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलनकारी छात्रों के साथ खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। उनका कहना था कि मामला किसी भी राज्य का हो या केंद्र का, वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे।
राहुल गांधी के इस ऐलान के बाद राजनीतिक सवाल खड़ा हो गया है कि क्या वह केंद्र की भाजपा सरकार को घेरने के साथ-साथ राज्यों में अपनी सरकारों की जवाबदेही तय करने के लिए भी तैयार हैं। पेपर लीक के मामले में छात्र झारखंड में आंदोलन कर रहे हैं, जहां कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ सत्ता में है। वहीं, कर्नाटक में भी छात्र अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
ऐसे में राहुल गांधी का यह कहना कि देश के किसी भी राज्य या केंद्र में यदि छात्रों की समस्याएं हैं तो वह उनके साथ खड़े रहेंगे, एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। यदि कांग्रेस शासित राज्यों में भी छात्रों को किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो क्या वहां भी राहुल गांधी उसी तरह सरकार से जवाब मांगेंगे, जैसा वह भाजपा शासित राज्यों में करते हैं?
राहुल गांधी लगातार देश की शिक्षा व्यवस्था में गिरावट को लेकर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर सीधा हमला कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भाजपा और आरएसएस ने शिक्षा व्यवस्था पर कब्जा कर लिया है, जिसके कारण बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वह केंद्र की भाजपा सरकार को घेरने के साथ-साथ कांग्रेस शासित राज्यों की कमियों पर भी उतनी ही सख्ती दिखाएंगे।
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भी सियासत
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान भी लगातार चर्चा में है। उत्तराखंड के देहरादून के बाद अब उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सवाल उठ रहा है कि भाजपा शासित राज्यों में राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को अनुमति देने में बाधाएं क्यों आ रही हैं।
देहरादून के बाद प्रयागराज से भी ऐसी खबरें सामने आई हैं कि जहां राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम करना चाहते हैं, वहां उन्हें अनुमति नहीं मिली। इससे यह भी चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं कार्यक्रम को रोकने के प्रयास ही उसे अधिक चर्चा और राजनीतिक महत्व तो नहीं दिला रहे। ऐसा प्रतीत होता है कि राहुल गांधी की आवाज मंच से कम और खबरों के माध्यम से अधिक गूंज रही है, जिसका असर छात्रों और युवाओं के बीच दिखाई दे रहा है। इससे उनके पक्ष में सकारात्मक माहौल बनने की भी चर्चा है।
मुख्य सवाल बरकरार
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्या राहुल गांधी केंद्र की भाजपा सरकार को चुनौती देने के साथ-साथ कांग्रेस शासित राज्यों की सरकारों की जवाबदेही तय करने और आवश्यक होने पर राजनीतिक कीमत चुकाने के लिए भी तैयार हैं?
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

















