
-प्रयागराज में उमड़ा छात्र-युवाओं का सैलाब
-‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से कांग्रेस को नई राजनीतिक ऊर्जा मिलने के संकेत
-देवेन्द्र यादव-

क्या नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश के छात्रों और युवाओं के बीच रोशनी के लिए टॉर्च जला दी है? शनिवार, 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं और युवाओं का उमड़ा जनसैलाब तो कुछ ऐसा ही संकेत देता है।
2022 में राहुल गांधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान देशभर में नफरत की दुकान की जगह मोहब्बत की दुकान खोलने के लिए निकले थे। अब 2026 में राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से छात्रों और युवाओं में रोशनी का संचार करने के लिए शायद निकल पड़े हैं।
राहुल गांधी ने प्रयागराज में छात्रों और युवाओं से संवाद करते हुए मौजूदा केंद्र सरकार के सिस्टम पर करारा वार किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल रही है और युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी मालामाल हो रही है। राहुल गांधी ने छात्रों और युवाओं को यह भी समझाने का प्रयास किया कि भारतीय जनता पार्टी कम समय में देश की सबसे अमीर पार्टी कैसे बन गई।
कार्यक्रम में बढ़ती छात्र-युवाओं की भागीदारी ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
राजस्थान के कोटा से शुरू हुआ राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम उत्तराखंड के देहरादून होते हुए 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज पहुंचा। जैसे-जैसे राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसमें छात्र-छात्राओं और युवाओं की तादाद भी बढ़ती जा रही है। यह दृश्य राहुल गांधी की 2022 की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की याद दिला रहा है।
जैसे-जैसे राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे उन्हें जनता का समर्थन मिलता रहा। यात्रा ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की और कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बड़ी सफलता हासिल की।
ठीक वैसा ही नजारा अब राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में देखने को मिल रहा है। राहुल गांधी छात्रों और युवाओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। यही वजह है कि छात्रों और युवाओं का राहुल गांधी के प्रति सीधा आकर्षण बढ़ता दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण राज्य है उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। उत्तर प्रदेश गांधी परिवार की राजनीतिक धरोहर भी रहा है। पंडित जवाहरलाल नेहरू, फिरोज गांधी, श्रीमती इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, संजय गांधी और अब राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के रायबरेली और अमेठी से लोकसभा का चुनाव लड़ते रहे हैं।
2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं और कांग्रेस लगभग चार दशक से भी अधिक समय से प्रदेश की सत्ता से बाहर है। हाल के दिनों में राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। इनमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रभारी अविनाश पांडे को बदलकर दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को प्रभारी बनाना और सभी प्रभारियों को बदलकर नए प्रभारियों की नियुक्ति करना भी शामिल है।
‘छात्रों की गूंज’ से भविष्य के कार्यकर्ताओं और नेताओं की तलाश संभव
राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कांग्रेस के बेहतर भविष्य के कार्यकर्ताओं और नेताओं की खोज का कार्यक्रम भी बन सकता है। मौजूदा समय में कांग्रेस के पास भाजपा से मुकाबला करने वाले लीडर और साहसी नेताओं की कमी नजर आती है। अधिकतर ऐसे नेता मौजूद हैं, जिन्हें संगठन या सत्ता में बड़ा पद चाहिए।
ऐसे में राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम कांग्रेस के लिए राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से राहुल गांधी छात्रों और युवाओं के बीच से नई राजनीतिक प्रतिभाओं की तलाश कर सकते हैं। संभव है कि कांग्रेस की नई टीम की नींव भी यहीं से तैयार हो।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

















