कूनो में फ़िर चीते बसाने की तैयारी, कोटा ताकता रह गया

देश में चीते बसाने बचाने के लिए केंद्र सरकार के आग्रह पर आए दक्षिण अफ्रीका-नामीबिया के चीता विशेषज्ञों ने देहरादून के वन्य जीव संस्थान के अधिकारियों के साथ चीतो को आबाद करने की दृष्टि से देश में उपर्युक्त वन क्षेत्र का कई जगह व्यापक सर्वेक्षण किया था और इस सर्वे के दायरे में शामिल किए गए कूनो समेत कोटा-झालावाड़ जिलों व रावतभाटा में फ़ैले मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में चीते बसाने के लिए मुकुंदरा हिल्स का दरा क्षेत्र का 82 वर्ग किलोमीटर का एनक्लोजर चीते बसाने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त स्थान है

-कृष्ण बलदेव हाडा-

kbs hada
कृष्ण बलदेव हाडा

मध्य प्रदेश के कूनो में एक बार फ़िर नामीबिया-दक्षिण अफ्रीका से लाकर चीते बसाए जाने की तैयारी है जबकि पूर्व में हुए अधिकारिक सर्वे में चीते बसाने के लिए सबसे अधिक उपर्युक्त माने गए कोटा संभाग के दरा अभयारण्य क्षेत्र में चीते बसाने की संभावनाओं के बारे में चर्चा तक नहीं हो रही है और पूर्व की तरह एक बार फ़िर से राजस्थान सरकार की इच्छाशक्ति के अभाव और केंद्र सरकार का राजनीतिक भेदभाव भरा नजरिया ही इसके लिये मुख्य रूप से जिम्मेदार माने जायेंगे।
ताजा जानकारी के अनुसार नामीबिया-दक्षिणी अफ्रीका से चीतों की दूसरी खेप इसी सप्ताह के अंत तक या आने वाले कुछ दिनों में भारत लाई जाने वाली है और उन्हें भी मध्य प्रदेश के गुना जिले के कूनो अभयारण्य क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहां इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 17 सितंबर को उनके जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय स्तर पर किए गए व्यापक प्रचार-प्रसार के बीच छोड़ा था। वहां उस समय डेढ़ हजार वर्ग मीटर के बाड़े में छोड़े गए 8 चीते अब वहां की पारिस्थितिकी माहौल से स्वयं को ढाल चुके हैं और वे सभी भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप स्वस्थ-स्वच्छंद रूप से कूनो अभयारण्य में विचरण कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश के पहले से ही लगातार इसमें गहरी रूचि लेते रहने एवं कोशिश करने के कारण उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप दूसरी खेप में लाए जा रहे करीब एक दर्जन जीते भी कूनो अभयारण्य में ही आबाद किए जाएंगे। यह मध्यप्रदेश के प्रयास,इच्छाशक्ति का ही नतीजा है कि एक बार कूनो में चीते बसाए जाने के बावजूद दूसरे खेप में लाए जा रहे चीते भी वही छोड़े जाने वाले हैं और यह स्थिति तो तब है जब देश में चीते बसाने बचाने के लिए केंद्र सरकार के आग्रह पर आए दक्षिण अफ्रीका-नामीबिया के चीता विशेषज्ञों ने देहरादून के वन्य जीव संस्थान के अधिकारियों के साथ चीतो को आबाद करने की दृष्टि से देश में उपर्युक्त वन क्षेत्र का कई जगह व्यापक सर्वेक्षण किया था और इस सर्वे के दायरे में शामिल किए गए कूनो समेत कोटा-झालावाड़ जिलों व रावतभाटा में फ़ैले मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का सर्वे करने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में चीते बसाने के लिए मुकुंदरा हिल्स का दरा क्षेत्र का 82 वर्ग किलोमीटर का एनक्लोजर चीते बसाने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त स्थान है। यहां तक कि नामीबिया-दक्षिणी अफ्रीकी विशेषज्ञों का तो यह तक कहना था कि दरा का 82 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा तो चीतो की दृष्टि से अफ्रीका की अपनी पर्यावरण-पारिस्थितिकी से भी कहीं अधिक उपयुक्त है, लेकिन इसके बावजूद चीते दरा की जगह कूनो में छोड़े गए क्योंकि कूनो भी दरा से कम ही सही, लेकिन चीते बसाये जाने के लिए उपर्युक्त तो था ही और इसके लिए वहां की सरकार ने कोशिश की खूब की थी।
अब यहां राज्यों के प्रयास पर राजनीतिक सोच अधिक कारगर साबित हुई है। इस बारे में राज्य वाइल्डलाइफ बोर्ड के सदस्य भरत सिंह कुंदनपुर का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार पहले से ही जागरूकता के साथ चीते बसाने की कोशिश कर रही थी, जबकि राजस्थान सरकार ने ऎसी रत्ती भर भी कोशिश नहीं की थी। इसके अलावा हाडोती ही नहीं राज्य भर से केंद्र में जन प्रतिनिधित्व कर रहे भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की वन-वन्यजीवों की संरक्षा-सुरक्षा के महत्व के बारे में इतनी न तो सोच है और न ही उन्हें कोई समझ कि वे दरा अभयारण्य में चीते बसाने के महत्व की कल्पना भी कर सके। उन्हें तो हर स्थिति में राजनीति करना है।

bharat singh
भरत सिंह

श्री भरत सिंह ने कहा कि भाजपा के जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक सोच इतनी संकीर्ण और निम्न स्तर की है कि यब तो तय है कि सर्वाधिक उपर्युक्त परिस्थितियां होने के कारण दरा अभयारण्य के इस 82 वर्ग किलोमीटर के एनक्लोजर में चीते तो एक न एक दिन जरूर बसाये जाएंगे लेकिन इसके लिए भाजपा के ओछी समझ वाले इन जनप्रतिनिधियों को उस दिन की प्रतीक्षा है, जिस दिन प्रदेश में कांग्रेस की जगह भाजपा की सरकार होगी। इस निम्न सोच का अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि दरा अभयारण्य का यह एनक्लोजर उस समय विकसित किया गया था जब राज्य में श्रीमती वसुंधरा राजे के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी, लेकिन देश में सर्वाधिक उपयुक्त माने जाने के बावजूद दरा में चीते इसलिए आबाद नहीं किए जा रहे हैं क्योंकि ऐसा करने का सलाह-मशविरा दिए जाते समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है।
श्री भरत सिंह ने भाजपा के जनप्रतिनिधियों को अपने इस निम्न स्तर की संकीर्ण सोच से उबरने की सलाह देते हुए यहां तक कहा कि – ” यह सही है कि चीते तो बीजेपी को वोट देने से रहे, लेकिन यदि बीजेपी के यह नेता वन एवं वन्यजीवों के बारे में अपनी समझ को विकसित कर दरा अभयारण्य क्षेत्र में चीते बसा दे तो निश्चित रूप से इससे क्षेत्र में पर्यटन का विकास होगा, बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा, होटल-ट्यूरिज्म-ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर मिलने से सैकड़ों परिवार लाभान्वित होंगे तो बीजेपी नेताओं के पास अपनी उपलब्धियां गिना कर इन जीते-जागते लोगों से वोट हासिल करने का हक तो होगा ही। इस नाते ही यह नेता राजनीति करे ले तो मुझे तो इसमें भी कोई आपत्ति नहीं है। ”
श्री भरत सिंह ने तो यह भी कहा कि अगर और ज्यादा राजनीतिक लाभ उठाना है तो जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरीकी काऊ बॉय की तरह हैट लगाकर सूट-बूट पहन कर नेशनल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के तामझाम के साथ कूनो में चीते छोड़कर अपने जन्मदिन पर वाहवाही बटोरी थी,वैसी ही कोशिश दरा में कर ले। प्रधानमंत्री यदि चीते छोड़ने दरा आएंगे तो बीजेपी को कुछ तो राजनीतिक लाभ मिलेगा ही। बीजेपी के स्थानीय नेता कम से कम अपने राष्ट्रीय नेता से इतनी तो उम्मीद रख ही सकते हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

Advertisement
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments