
-विवेक कुमार मिश्र-

किसी एक बात में दुनिया नहीं होती
न ही दुनिया एक बात से खत्म होती
बातें हैं अपने हिसाब से आती रहती
अपने समय संदर्भ से आती रहती हैं
बातों के अनंत आकाश में
उड़ने से पहले एक बार
जमीन पर पांव जरूर रखें
परिंदे उड़ने से पहले
एक बार पंख फैला कर देखते हैं
कि हवाएं क्या कह रही हैं
उनके थपेड़े सह पायेंगे कि नहीं
यह जानना भी जरूरी है
फिर उड़ चलें पंख फैला कर
आकाश भी छोटा पड़ जाता है
ऐसा इरादा रख जब उड़ चलें पंछी तो
कुछ भी मुश्किल नहीं है
फिर तो आकाश भी पंखों की जद में आ जाता है
कह रहे उड़ते उड़ते पंछी …!
-विवेक कुमार मिश्र-
आचार्य हिंदी
राजकीय कला महाविद्यालय कोटा
एफ -9 समृद्धि नगर स्पेशल बारां रोड कोटा -324002

















