समझ सको तो समझ लो हमारा ग़म क्या है। जो ऑंख ख़ुश्क थी पहले अब उसमे नम* क्या है।।

books of shakoor anwar

ग़ज़ल

-शकूर अनवर-

shakooranwar
शकूर अनवर

समझ सको तो समझ लो हमारा ग़म क्या है।
जो ऑंख ख़ुश्क थी पहले अब उसमे नम* क्या है।।
*
तुम्हारे क़ुर्ब* की ख़्वाइश किसे नहीं होती।
ऐ मेरे दोस्त मेरी आरज़ू में दम क्या है।।
*
ये क्या सितम किया तुमने कि तू को छोड़ दिया।
तुम्हारे तर्ज़े-तकल्लुम* में अब ये हम क्या है।।
*
जहाँ पे चैन मिलेगा वहीं पे जायेंगे।
हमारे वास्ते क्या बुतकदा, हरम क्या है।।
*
कहाँ गये वो सितारे जो साथ चलते थे।
ये तीरगी* का समन्दर क़दम-क़दम क्या है।।
*
नज़र की हद* को समझता है आसमाॅं “अनवर”।
ये आसमाॅं है तो फिर ऑंख का भरम क्या है।।
*

नम*गीलापन
क़ुर्ब*समीप होना पास होना
तर्ज़-तकल्लुम*बात करने का अंदाज़
बुतकदा*जहाॅं मूर्तियाँ रखी जाती हों मंदिर
हरम*काबा
तीरगी*अंधकार
नज़र की हद*दृष्टि की सीमा

शकूर अनवर
9460851271

Advertisement
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments