अशोक गहलोत की तमिलनाडु और गुजरात में सक्रियता के क्या हैं मायने!

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राहुल गांधी का संकेत, गहलोत की पहल या राष्ट्रीय राजनीति की नई तैयारी!

-देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने राजस्थान से बाहर निकलकर अचानक तमिलनाडु और गुजरात में सक्रियता बढ़ा दी है। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इन दोनों राज्यों पर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की विशेष नजर रही है।

तमिलनाडु में राहुल गांधी ने द्रमुक (डीएमके) के साथ गठबंधन को मजबूती दी और चुनावी रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बदलाव करते हुए अपने भरोसेमंद नेताओं मणिकम टैगोर और गुलाम अहमद मीर को जिम्मेदारी सौंपी।

ऐसे में अशोक गहलोत का तमिलनाडु और गुजरात जाकर वहां के कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करना कई सवाल खड़े करता है। क्या यह कांग्रेस हाईकमान या राहुल गांधी के निर्देश पर हो रहा है? या फिर गहलोत अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश दे रहे हैं कि उनका प्रभाव केवल राजस्थान तक सीमित नहीं, बल्कि उत्तर से दक्षिण तक कांग्रेस संगठन में बना हुआ है? यह भी सवाल उठता है कि क्या गहलोत भविष्य में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की संभावनाओं को देखते हुए देशभर में अपने लिए माहौल तैयार कर रहे हैं?

गुजरात से गहलोत का पुराना राजनीतिक रिश्ता

यदि गुजरात की बात करें तो अशोक गहलोत का नाम सबसे अधिक 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान चर्चा में आया था। उस समय वह गुजरात कांग्रेस के प्रभारी थे। कांग्रेस सत्ता तक तो नहीं पहुंच सकी, लेकिन उसने भाजपा को 99 सीटों पर रोक दिया और स्वयं 77 सीटें जीतकर मजबूत चुनौती पेश की। उस चुनाव के बाद माना गया कि कांग्रेस ने लंबे समय बाद गुजरात में सत्ता वापसी की उम्मीद जगा दी है।

हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। कांग्रेस को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा। उस समय भी अशोक गहलोत चुनाव के प्रमुख पर्यवेक्षकों में शामिल थे और उनके करीबी माने जाने वाले रघु शर्मा गुजरात कांग्रेस के प्रभारी थे। राजनीतिक चर्चा में अक्सर 2017 की उपलब्धि का उल्लेख होता है, लेकिन 2022 की करारी हार पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। यह भी तथ्य है कि उस समय गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री होने के साथ गुजरात चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे।

क्या 2027 के लिए नई भूमिका तय हो रही है?

यह भी माना जाता है कि गुजरात कांग्रेस में आज भी दिवंगत नेता अहमद पटेल से जुड़े कई नेता प्रभावशाली पदों पर हैं और उनका राजनीतिक समीकरण अशोक गहलोत के साथ भी जुड़ा रहा है। गहलोत के गुजरात पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्वयं एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे। इसे भी राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

गुजरात में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या राहुल गांधी एक बार फिर अशोक गहलोत को गुजरात में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं? संयोग यह भी है कि राहुल गांधी इन दिनों विदेश दौरे पर हैं, जबकि अशोक गहलोत राजस्थान से बाहर लगातार संगठनात्मक गतिविधियों में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।

राहुल गांधी की रणनीति और अनुत्तरित सवाल

गुजरात राहुल गांधी की प्राथमिकता वाले राज्यों में रहा है। 2017 के चुनाव में उनकी सक्रियता ने कांग्रेस को मजबूत प्रदर्शन तक पहुंचाया था। अब एक बार फिर कांग्रेस को उम्मीद है कि 2027 में वह बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल अशोक गहलोत की मौजूदा सक्रियता को लेकर है। यदि 2017 और 2022, दोनों चुनावों में उनके पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी, तो 2017 की सफलता सरकार बनने में क्यों नहीं बदल सकी? और 2022 में कांग्रेस को इतनी बड़ी हार क्यों झेलनी पड़ी? क्या इन सवालों पर राहुल गांधी भविष्य की रणनीति तय करते समय गंभीर मंथन करेंगे?

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

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