केरल में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री चयन पर मंथन

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photo courtesy social media
केरल में लंबे समय बाद मिली प्रचंड जीत के बावजूद कांग्रेस अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा तय नहीं कर पाई है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रिय मौजूदगी के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर कई दावेदार सामने हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि कांग्रेस की यह जीत स्थानीय नेतृत्व की बदौलत मिली या गांधी परिवार की राजनीतिक उपस्थिति के कारण।

-देवेन्द्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

लगातार तीन लोकसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद कांग्रेस के भीतर नेताओं की कोई कमी नहीं है। इसका बड़ा उदाहरण केरल में लंबे समय बाद कांग्रेस को मिली जीत है, जहां कांग्रेस हाईकमान, वायनाड से पूर्व सांसद रहे राहुल गांधी और वर्तमान सांसद प्रियंका गांधी अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं कर पाए हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि केरल में कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार मौजूद हैं, जो लंबे समय से इस उम्मीद में थे कि पार्टी सत्ता में आएगी और उन्हें मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलेगा।


पांच राज्यों के चुनाव और केरल में कांग्रेस की सफलता

अप्रैल 2026 में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम 4 मई को आए। कांग्रेस ने पांच में से केवल एक राज्य केरल में प्रचंड जीत दर्ज की, जबकि बाकी चार राज्यों में उसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस केरल में क्यों और कैसे जीती? क्या यह जीत मुख्यमंत्री पद के दावेदार नेताओं के दम पर मिली या फिर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रिय उपस्थिति के कारण?


दूसरे राज्यों में क्यों हारती रही कांग्रेस?

यदि यह माना जाए कि कांग्रेस मुख्यमंत्री पद के दावेदार नेताओं के कारण जीती है, तो फिर 2014 के बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में कांग्रेस चुनाव क्यों हारती रही? इन राज्यों में भी कांग्रेस के पास मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार मौजूद रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस वहां जीत दर्ज नहीं कर पाई। इसका प्रमुख कारण नेताओं के बीच आपसी गुटबाजी को माना जाता है, जिसने पार्टी को लगातार नुकसान पहुंचाया।


2021 की हार और 2026 की जीत का अंतर

यदि केरल की राजनीति की बात करें तो 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता में वापसी नहीं कर पाई थी। जबकि 2019 में राहुल गांधी पहली बार वायनाड से सांसद चुने गए थे और उस समय यह माना जा रहा था कि कांग्रेस राज्य में सत्ता में लौट आएगी। लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच चली खींचतान ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया और कांग्रेस सत्ता से दूर रह गई।

हालांकि 2026 में भी मुख्यमंत्री पद को लेकर दावेदार मौजूद थे, लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रिय उपस्थिति ने इस अंतर्विरोध को अन्य राज्यों की तरह हार में बदलने नहीं दिया। राहुल और प्रियंका गांधी की जोड़ी ने आम जनता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सकारात्मक माहौल बनाया, जिसका लाभ कांग्रेस को मिला और पार्टी लंबे समय बाद सत्ता में लौटने में सफल रही।


मुख्यमंत्री चयन कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती

दिलचस्प बात यह है कि जीत के बाद भी कांग्रेस हाईकमान, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अब तक मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं कर पाए हैं। यदि कांग्रेस के प्रति त्याग और गांधी परिवार के प्रति वफादारी की बात की जाए तो रमेश चेन्निथला का नाम सबसे ऊपर आता है। वे लंबे समय से मुख्यमंत्री बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। केरल में मुख्यमंत्री का चयन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। राहुल गांधी दो बार केरल से सांसद रह चुके हैं और प्रियंका गांधी वर्तमान में राज्य से सांसद हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि दोनों की मजबूत मौजूदगी के बावजूद मुख्यमंत्री के नाम पर इतनी देरी क्यों हो रही है?


क्या राहुल गांधी कोई बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं?

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि क्या राहुल गांधी केरल में कोई मास्टर स्ट्रोक खेलने की तैयारी में हैं? क्या वे किसी युवा चेहरे को मुख्यमंत्री बना सकते हैं? इस संदर्भ में चांडी ओमन का नाम भी चर्चा में है, जो दूसरी बार विधायक बने हैं। उनके पिता ओमन चांडी केरल के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। चांडी ओमन राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं और भारत जोड़ो यात्रा के दौरान वे राहुल गांधी के साथ नंगे पैर चले थे। युवा नेतृत्व के रूप में उन्हें भविष्य के विकल्प के तौर पर भी देखा जा रहा है।


(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

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