
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या गांधी परिवार वर्ष 2022 की तरह एक बार फिर अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव देगा। वह प्रस्ताव जिसे गहलोत ने उस समय इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि वह राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहना चाहते थे। इसका जवाब आने वाले समय की राजनीतिक परिस्थितियां ही देंगी।
बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच फिर तेज हुई नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा
-देवेन्द्र यादव-

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राजस्थान के बाद देशभर में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अयोध्या में राम मंदिर चंदा चोरी के मुद्दे पर अक्टूबर में महाकाल की नगरी उज्जैन से रामनगरी अयोध्या तक पदयात्रा की घोषणा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सवाल यह उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के इन दोनों वरिष्ठ नेताओं की नजर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर है। कांग्रेस के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल समाप्ति की ओर है और वह 84 वर्ष की आयु पार कर चुके हैं। संभव है कि दोनों नेताओं को लगता हो कि अब उनके लिए कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का अवसर आ सकता है, जो अवसर वर्ष 2022 में उनके हाथ से निकल गया था।
वर्ष 2022 से पहले सोनिया गांधी लगातार कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं। उस समय भाजपा गांधी परिवार पर कांग्रेस अध्यक्ष पद नहीं छोड़ने का आरोप लगाती थी। इसके बाद राहुल गांधी ने फैसला किया कि गांधी परिवार का कोई भी सदस्य कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनेगा और पार्टी के किसी अन्य वरिष्ठ नेता को यह जिम्मेदारी दी जाएगी।
उस समय सबकी नजर राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर गई। कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उन्हें बुलाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव दिया, लेकिन अशोक गहलोत ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, क्योंकि वह राजस्थान के मुख्यमंत्री पद को छोड़ना नहीं चाहते थे।
गहलोत के इनकार के बाद, जब राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा पर थे, तब कर्नाटक में यह निर्णय लिया गया कि मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाए। उस समय राहुल गांधी के साथ यात्रा में शामिल दिग्विजय सिंह ने भी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का प्रयास किया था। वह अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार हो गए थे, लेकिन अंततः राहुल गांधी की पसंद पर मुहर लगी और मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए।
अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री नहीं हैं और दिग्विजय सिंह भी राज्यसभा के सदस्य नहीं हैं। पार्टी के भीतर भी दोनों नेताओं के पास कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में दोनों नेता अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रखने के प्रयास में जुटे हैं। एक ओर अशोक गहलोत राष्ट्रीय राजनीति में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दिग्विजय सिंह ने एक और पदयात्रा की घोषणा कर दी है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों नेताओं का लक्ष्य एक ही है। क्या दोनों की नजर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं और दोनों राज्यों में अगले चुनाव वर्ष 2028 में होने हैं।
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी में नई पीढ़ी को बड़ी जिम्मेदारियां देने का संकेत दे चुके हैं। ऐसे में अशोक गहलोत और दिग्विजय सिंह के अपने-अपने राज्यों में फिर से मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं कमजोर मानी जा रही हैं।
इसके बावजूद यह उल्लेखनीय है कि दोनों नेता अपने-अपने राज्यों में आज भी प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियां हैं। दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश के 10 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे हैं, जबकि अशोक गहलोत राजस्थान के 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यही कारण है कि दोनों की राजनीतिक पकड़ अभी भी मजबूत मानी जाती है।
दोनों नेता अपने-अपने राज्यों में इतने प्रभावशाली हैं कि यदि वे स्वयं मुख्यमंत्री नहीं बनते, तब भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। मध्य प्रदेश में इसका उदाहरण पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2018 में कांग्रेस ने लंबे समय बाद सरकार बनाई थी, जिसमें दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा यात्रा को भी महत्वपूर्ण माना गया। लेकिन एक वर्ष बाद ही सरकार गिर गई। कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के बजाय कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया, जिससे सिंधिया नाराज होकर भाजपा में शामिल हो गए। उनके साथ कांग्रेस के 24 विधायक भी भाजपा में चले गए और सरकार अल्पमत में आकर गिर गई।
अब सवाल यह है कि क्या अशोक गहलोत की सबसे बड़ी राजनीतिक इच्छा कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की है। हाल ही में वह तमिलनाडु पहुंचे। इसके बाद दिल्ली में अयोध्या चंदा चोरी मामले को लेकर उन्होंने एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इन घटनाओं के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई कि क्या अशोक गहलोत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की ओर नजर लगाए हुए हैं।
हालांकि, सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या गांधी परिवार वर्ष 2022 की तरह एक बार फिर अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव देगा। वह प्रस्ताव जिसे गहलोत ने उस समय इसलिए ठुकरा दिया था क्योंकि वह राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहना चाहते थे। इसका जवाब आने वाले समय की राजनीतिक परिस्थितियां ही देंगी।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं।)

















