
शिक्षा नगरी कोटा से 17 जून को राहुल गांधी के छात्र संवाद अभियान की शुरुआत से पहले दिल्ली से आई उनकी टीम ने तैयारियों की कमान संभाल ली है। कांग्रेस के स्थानीय और क्षेत्रीय नेता सक्रिय नजर आ रहे हैं, लेकिन राजस्थान कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे में यह कार्यक्रम केवल छात्र संवाद ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक समन्वय और राजनीतिक रणनीति की भी परीक्षा माना जा रहा है।
-देवेंद्र यादव-

17 जून को राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए टीम राहुल गांधी ने दिल्ली से कोटा पहुंचकर कमान संभाल ली है। इसके साथ ही राजस्थान कांग्रेस, खासकर हाड़ौती संभाग के नेता भी सक्रिय दिखाई देने लगे हैं।
मैंने अपने पिछले ब्लॉग में उल्लेख किया था कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 17 जून के कोटा दौरे को लेकर हाड़ौती संभाग सहित राजस्थान कांग्रेस के कई बड़े नेता अपेक्षित रूप से सक्रिय नजर नहीं आ रहे थे। हालांकि 15 जून को दिल्ली से राहुल गांधी की टीम के कोटा पहुंचते ही राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री शांति धारीवाल, विधायक हरिमोहन शर्मा सहित कई प्रमुख नेता सक्रिय दिखाई दिए।
दिल्ली से आए बेजू, मनोज त्यागी और मिश्रा के नेतृत्व में 15 जून को पूरे दिन कांग्रेस नेताओं के साथ बैठकों का दौर चला। इन बैठकों में राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम को सफल बनाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
छात्र संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बढ़ी सक्रियता
राजस्थान छात्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक अभिमन्यु पूनिया, राजस्थान अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एम.डी. चौपदार सहित कांग्रेस के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सक्रिय नजर आए। इसके बावजूद एक बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है कि राजस्थान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अब तक सार्वजनिक रूप से सक्रिय क्यों नहीं दिखाई दिए।
कोटा के बाद जुलाई में उत्तर प्रदेश और बिहार में भी राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। बिहार में 17 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों के लिए वहां के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Rajesh Ram और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी कृष्णा अल्लावरुअपनी टीम के साथ एक महीने पहले से ही सक्रिय हो चुके हैं।
कोटा से होगा देशव्यापी छात्र संवाद अभियान का आगाज
राहुल गांधी 17 जून को शिक्षा नगरी कोटा से अपने छात्र संवाद अभियान की शुरुआत करने जा रहे हैं। इस कार्यक्रम को देशव्यापी स्तर पर सफल बनाने के लिए उन्होंने अपनी टीम को सक्रिय कर दिया है। मनोज त्यागी, बेजू और मिश्रा कोटा में लगातार कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर रहे हैं। राजस्थान कांग्रेस की राष्ट्रीय सह-प्रभारी तथा हाड़ौती संभाग की प्रभारी भी पिछले तीन दिनों से क्षेत्र का दौरा कर कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा ले रही हैं।
छात्रों की समस्याओं को संसद तक पहुंचाने की तैयारी
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और टीम राहुल गांधी के सदस्य मनोज त्यागी ने कार्यकर्ताओं और नेताओं की बैठक में कहा कि राहुल गांधी का छात्र संवाद कार्यक्रम कांग्रेस के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना था कि राहुल गांधी लंबे समय से छात्रों की समस्याओं को संसद से लेकर सड़क तक उठाते रहे हैं।
मनोज त्यागी के अनुसार, भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने सीधे जनता से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना था और उन मुद्दों को राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया था। अब वे देशभर के छात्रों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याओं को समझेंगे और उन्हें संसद में उठाने का प्रयास करेंगे। जुलाई में संसद का वर्षाकालीन सत्र शुरू होने वाला है। ऐसे में माना जा रहा है कि छात्र संवाद कार्यक्रमों से प्राप्त मुद्दों को राहुल गांधी संसद में प्रमुखता से उठाते हुए नजर आ सकते हैं।
कोटा का राजनीतिक महत्व
दिलचस्प तथ्य यह है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी शिक्षा नगरी कोटा से ही लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। वहीं राहुल गांधी अपने देशव्यापी छात्र संवाद अभियान की शुरुआत भी 17 जून को कोटा से करने जा रहे हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम राजनीतिक और प्रतीकात्मक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

















