कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सिनेमाघरों में विवादास्पद फिल्म द केरल स्टोरी के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने निर्माता की दलील दर्ज की कि वे अपने सोशल मीडिया हैंडल से फिल्म के कथित आपत्तिजनक टीज़र को हटा देंगे।
अदालत ने कहा, तथ्य यह है कि किसी भी याचिकाकर्ता ने फिल्म को पूरी तरह से नहीं देखा है। सीबीएफसी जैसे सक्षम वैधानिक प्राधिकरण ने फिल्म की जांच की है और इसे प्रसारण के लिए उपयुक्त पाया है। अदालत ने यह भी कहा कि निर्माताओं ने फिल्म के साथ एक डिस्क्लेमर जारी किया है जिसमें विशेष रूप से कहा गया है कि फिल्म काल्पनिक है और घटनाओं का एक नाटकीय संस्करण है। फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं की सटीकता या तथ्यात्मकता का दावा नहीं करती है।
न्यायाधीश एन नागेश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा, डिस्क्लेमर के मद्देनजर भी हमने फिल्म को प्रदर्शित करने से रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन की ओर से भारत के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल एस मनु ने कहा कि सोशल मीडिया पर जारी फिल्म- द केरल डायरी का टीजर बोर्ड द्वारा प्रमाणित नहीं है। फिल्म की जांच के दौरान यह पाया गया कि फिल्म निर्माता द्वारा 32,000 महिलाओं के सांख्यिकीय आंकड़ों के बारे में सीधे तौर पर कोई दावा नहीं किया गया है।
फिल्म की कहानी 3 लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं, लेकिन उन्हें गलत रास्ता चुनने के लिए बहकाया जाता है और इस तरह आतंकवादी समूहों के साथ काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
सीबीएफसी ने कहा कि फिल्म को बोर्ड द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया है और सामग्री के उचित विश्लेषण के बाद किए जाने वाले संशोधनों का अनुपालन किया गया है।

















