पाकिस्तानः अधर में आईएमएफ लोन

prime minister pakistan

-द ओपिनियन-

आर्थिक तंगी में फंसा पाकिस्तान पाई पाई को तरस रहा है। सारी उम्मीदें कर्ज पर टिकी हैं। खाड़ी देशों से लेकर जहां उसको उम्मीद नजर आई वह गुहार लगा चुका है और अब सारी उम्मीदें अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) पर टिकी हैं। लेकिन अभी सब कुछ अधर में है।
पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएमएफ की तरफ से पांच अरब डॉलर का जो लोन मिलने वाला था, वह अटक गया लगता है। इस्लामाबाद को अभी तक इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल पॉलिसीज ड्रॉफ्ट नहीं मिला है जबकि सिर्फ दो दिन बचे हैं। हालांकि पाकिस्तान सरकार को उम्मीद है कि वह गुरुवार तक आईएमएफ एक बेहतरीन डील के लिए राजी कर लेगी। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय को उम्मीद थी कि बुधवार तक उसे ड्राफ्ट मिल जाएगा। अगर आईएमएफ पहला ड्राफ्ट सौंप देता है तो फिर अगले 24 घंटे के अंदर देश को राहत मिल सकती है। लेकिन इसमें ऊर्जा सेक्टर सबसे बड़ी बाधा माना जा रहा है।

कर्ज के सहारे कब तक
लेकिन बात यह भी है कि कर्ज मिल जाए तब भी पाकिस्तान कर्ज से कब तक पेट भरेगा। धीरे धीरे उसके अपने ही दोस्त या बिरादर मुल्क भी किनारा करने लगे हैं।

भारत को कोसने के लिए शब्दों की कोई तंगी नही

पाकिस्तान में आर्थिक तंगी भले ही हो लेकिन भारत को कोसने या धमकाने के लिए उसके पास शब्दों की कभी तंगी नहीं रहती। इसके लिए उनके पास कश्मीर मसले का सदाबहार सब्जेक्ट है। यूएई से भारत से रिश्तों में सुधार में सहयोग की गुहार लगाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मौके-बेमौके कश्मीर के नाम पर भारत को कोसने में कसर नहीं रखते। दो तीन दिन पहले वे कश्मीर का नाम लेकर खूब गरजे। अब पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान क्यों पीछे रहें। भारत को कोसने में शरीफ कहीं बाजी नहीं मार लें। वे भी खूब बरसे। इमरान प्रधानमंत्री बने तो ऐसे बयान दिए कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं ही खत्म हो गई। अब कह रहे हैं कि भारत जब तक कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली नहीं करेगा तब तक भारत से पाकिस्तान कोई बातचीत नहीं करेगा। भई मत करो बातचीत भारत कब आपसे बातचीत की गुहार लगाने आ रहा है।
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सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं इमरान

पाकिस्तान में इस साल के आखिर में चुनाव होना है और इमरान खान सत्ता में वापसी का सपना देख रहे हैं। इसलिए वह भारत के खिलाफ बयानबाजी कर लोकप्रियता हासिल करना चहते है। इसलिए जोर शोर से कह रहे हैं कि जब तक भारत कश्मीर की मूल स्थिति को बहाल नहीं करता, हम भारत के साथ बातचीत का समर्थन नहीं करेंगे। यहां तक कि अगर मैं सत्ता में वापस आता हूं, तो भी मैं भारत के साथ तब तक बातचीत नहीं करूंगा जब तक कि कश्मीर की पुरानी स्थिति बहाल नहीं कर दी जाती। पाकिस्तानी नेता जो ताकत भारत को कोसन में लगा रहे हैं यदि व उतनी ताकत अपने देश की हालत सुधारने में लगाएं तो कुछ फायदा होगा ।

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