सिटी पैलेस कोटाः अनेकों महल से सुसज्जित

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गढ़ पैलेस का प्रवेश द्वार: फोटोः एएच जैदी

-एएच जैदी-

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एएच जैदी

कोटा। हाडोती का प्रमुख शहर कोटा एक समय बून्दी के राज कुमार की जागीर था। 1264 ई0 में राजकुमार जेतसी ने कोटया भील को हराकर कोटा की स्थापना की थी। तब राव माधो सिंह जी कोटा के प्रथम शासक बने। तब से कोटा का गढ पैलेस करीब आठ सौ साल के इतिहास का गवाह रहा है। कोटा आने वाले पर्यटकों के लिए कोटा बैराज और चंबल नदी के किनारे स्थित यह गढ पैलेस आकर्षण का प्रमुख केन्द्र है। यह चंबल नदी के किनारे चटृटानों के धरातल पर निर्मित है।
नक्कार खाने के नीचे सेलार गाज़ी के पास वाला दरवाज़ा गढ़ में आने जाने का हुआ करता था। जो वर्तमान किले की दीवार के पीछे है। गढ़ के बाहर का लाल वाला भाग बड़ा दरवाज़ा महाराव उम्मेद सिंह जी द्वितीय ने बनवाया था।

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गढ पैलेस परिसर में स्थित महल। फोटोः एएच जैदी

गढ़ के अंदर नीचे की ओर बादल महल, अलसी महल, दिलकुशा बाग और जंतर बुर्ज हैं। ऊपर जलेब चौक, छोटा बाद चबूतरा, हाथीपोल, नक्कार खाना, कंवर पदी महल, जनाना महल, अर्जुन महल, भीम महल, आनंद महल, बड़ा महल, छत्र महल, अखाड़ा महल, राज महल इत्यादी हैं।
इसी परिसर में बृजनाथ जी का मंदिर, लक्ष्मी नाथ जी का मंदिर, गणेश मंदिर, शिव मंदिर और कई मन्दिर हैं।
जलेब चौक में अखाडा सजता था जहां पहलवानों की कुश्तियां होती थी। बड़ा चबूतरा पर दरी खाना लगता था।
वर्तमान में भी बड़े चबूतरे पर रावण दहन से पुर्व आस पास के पूर्व राजा, जागीरदार, ठिकाने दार पारंपरिक वेश भूषा में शामिल होते हैं। यहीं से रावण दहन की पुरानी रस्म को निभाते हुए सवारी के रूप में भगवान लक्ष्मी नाथ जी की की सवारी के साथ जाते है।

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गढ पैलेस परिसर। फोटोः एएच जैदी

इस अवसर पर गढ़ के जलेब चौक में लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। शहर के तमाम गणमान्य व जनप्रतिनिधि कोटा दरबार को विजय दशमी की बधाई देते हैं।

(लेखक टूरिस्ट एवं नेचर प्रमोटर तथा ख्यातनाम फोटोग्राफर हैं)

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