
-अनीता मैठाणी

ठहरे रहो ना
कुछ देर आकर
मेरे-
दरवाजे पर
खिड़की पर
पहली फु़र्सत में
आऊँगी
बाल सुखाने के बहाने;
तुमसे
दो चार बातें कर जाऊँगी…
मेरी खिड़की पर
ठिठके सूरज
सुनो ना!
मेरी
छोटी सी इल्ति़जा,
खोल दूंगी
गीले बालों की तरह
बातों की गिरह
बाल सुखाऊँगी
साथ ही
कुछ बातें कह-सुन जाऊँगी…
अनीता मैठाणी
Advertisement


















वाह! बहुत सुंदर ????