बावफ़ा तुम जो रही नहीं मुझसे, पर वफ़ा कर तुझ से निभाऊँगा

badrinaath
फोटो साभार अरूण कुमार तिवारी

-लक्ष्मण सिंह-

laxman singh
लक्ष्मण सिंह

दर्द मेरा है मैं ही संभालूँगा
दर्द तेरा है मैं ही मिटाऊँगा

छोड़ देते है निकल गया मतलब
पर तुम्हारे काम मैं ही आऊँगा

इश्क बस तुमसे किया है मैंने तो
यह विरासत को मैं स॔भलाऊँगा

बावफ़ा तुम जो रही नहीं मुझसे
पर वफ़ा कर तुझ से निभाऊँगा

दूर जाना तेरी तो रही फितरत
फासला हर हाल में घटाऊँगा

हिज्र में कटती नहीं ये शब देखो
वस्ल मिल जाए गले लगाऊँगा

ढूँढता उल्फ़त में इक सकूँ यारों
पा के फिर आगोश मुस्कुराऊँगा

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