
कांग्रेस ने जिस तरह से जल्दी तैयारी शुरू की है, उससे साफ है कि पार्टी 2026 के चुनाव को असम में सत्ता में वापसी के अवसर के रूप में देख रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितनी कारगर साबित होती है और क्या गौरव गोगोई वास्तव में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे निकल पाते हैं।
-देवेंद्र यादव-

असम की राजनीति में लगभग डेढ़ दशक बाद कांग्रेस की वापसी की संभावना को लेकर पार्टी के भीतर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में इस बार सत्ता में वापसी को लेकर उत्साह भी दिखाई दे रहा है।
सोमवार 9 मार्च को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या कांग्रेस की जीत होने पर गौरव गोगोई मुख्यमंत्री होंगे, तो असम के प्रभारी और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेन्द्र सिंह ने संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि गौरव गोगोई पार्टी के मजबूत नेता हैं, लेकिन मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव में जीतने वाले विधायक मिलकर करेंगे।
दरअसल, राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व ने असम में चुनावी रणनीति को लेकर काफी पहले से सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। अभी विधानसभा चुनाव की घोषणा भी नहीं हुई है, लेकिन कांग्रेस लगभग 43 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। इससे यह संकेत देने की कोशिश है कि पार्टी इस बार चुनाव को गंभीरता से लड़ना चाहती है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने असम में चुनावी तैयारियों की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी को सौंपी है। प्रत्याशी चयन के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी में भी उनकी अहम भूमिका है। उनके साथ कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के रणनीतिकार डी के शिवकुमार को भी जोड़ा गया है, जो संगठन और चुनावी प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
हाल ही में दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में असम गण परिषद से जुड़े कुछ नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हुए। असम की राजनीति में छात्र और युवा आंदोलनों की ऐतिहासिक भूमिका रही है। पहले भी छात्र आंदोलन से निकली असम गण परिषद ने राज्य में सरकार बनाई थी। ऐसे में युवा नेताओं का कांग्रेस की ओर झुकाव पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं। पिछले कई चुनावों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है, लेकिन इस बार संगठन को मजबूत करने और उम्मीदवारों की जल्दी घोषणा करने की रणनीति अपनाई गई है। पार्टी को उम्मीद है कि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और चुनावी तैयारी को समय मिलेगा।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि यदि कांग्रेस सत्ता में लौटती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा। पार्टी में कई नेता सक्रिय हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष के रूप में गौरव गोगोई स्वाभाविक रूप से इस चर्चा के केंद्र में हैं। वे लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता भी हैं और असम की राजनीति में लगातार सक्रिय रहे हैं।
असम की राजनीति में बाहरी व्यापारिक समुदायों का भी प्रभाव माना जाता है। खासकर राजस्थान से जुड़े मारवाड़ी व्यापारी लंबे समय से असम के व्यापार और उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इसके बावजूद विधानसभा चुनाव में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व कांग्रेस के भीतर कम दिखाई देता है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार कांग्रेस किसी मारवाड़ी नेता को भी टिकट देगी।
राजस्थान से आने वाले कांग्रेस नेता भंवर जितेंद्र सिंह इस समय असम के प्रभारी हैं। इसलिए राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि क्या वे राजस्थान मूल के किसी प्रभावशाली मारवाड़ी नेता को चुनावी मैदान में उतारने की पहल करेंगे।
फिलहाल चुनाव की घोषणा अभी बाकी है, लेकिन कांग्रेस ने जिस तरह से जल्दी तैयारी शुरू की है, उससे साफ है कि पार्टी 2026 के चुनाव को असम में सत्ता में वापसी के अवसर के रूप में देख रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह रणनीति चुनावी नतीजों में कितनी कारगर साबित होती है और क्या गौरव गोगोई वास्तव में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे निकल पाते हैं।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

















