
-कृष्ण बलदेव हाडा-
कोटा। कृषि के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रबी सत्र नजदीक है और पहले ही से किसानों को कृषि सत्र के दौरान उनकी जरूरत के मुताबिक यूरिया-डीएपी की उपलब्धता की चिंता सताने लगी है क्योंकि इस मामले में बीते सालों में किसानों के अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं। आमतौर पर होता भी यही रहा है कि मानसून सत्र के बीत जाने के बाद अच्छी बरसात हो जाने से कोटा संभाग के नहरी सिंचित क्षेत्र में सिंचाई के लिए नहरो से पर्याप्त पानी मिलते रहने की उम्मीद और अन्य गैर-नहरी क्षैत्रों में अच्छी बरसात से भूमिगत जल स्तर ऊंचा उठने और नलकूपों से पानी की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए हाडोती अंचल में किसान अपनी अच्छी फसल और उससे बाद में अच्छे मुनाफे की उम्मीद की आशा में अपेक्षाकृत अधिक पानी की जरूरत वाली महत्वपूर्ण लहसुन, गेहूं,चना,धनिया आदि सहित कम पानी की आवश्यकता वाली लेकिन हाडोती की प्रमुख फसल मानी जाने वाली सरसों की व्यापक पैमाने बुवाई तो कर देते हैं और कृषि सत्र के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी मिल जाता है लेकिन जरूरत के मुताबिक यूरिया-डीएपी नहीं मिलने मिल पाने से किसानों को काफी दिक्कत उठानी पड़ती है। किसानों के उर्वरक के लिए घंटों नहीं बल्कि दिनों तक अपना नंबर लगाकर खाद मिलने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है और कई किसानों को तो खाद की कमी के कारण नुकसान भी उठाना पड़ता है।
ऐसे ही हालात इस बार भी हैं। किसान के अनुसार, इस बार मानसून सत्र अच्छा बीता और सिंचाई के लिए पूरे हाडोती संभाग के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ में पर्याप्त पानी उपलब्ध है लेकिन यूरिया और डीएपी जैसे जरूरी उर्वरकों की भविष्य में कृषि संबंधी जरूरतों के मुताबिक उपलब्धता को लेकर किसानों में अभी से आशंका व्याप्त है और इन्हीं आशंकाओं के चलते कुछ संपन्न किसानों ने तो अभी से बड़े पैमाने पर खाद की खरीद शुरू कर दी है जिससे छोटे-मझोले किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है।

रवी की फसल के लिए उपयोगी फर्टिलाइजर की फाइल फोटो
चिंता से राजस्थान के कृषि विभाग को अवगत करवाया
कई किसान संगठनों ने इस चिंता से राजस्थान के कृषि विभाग को अवगत भी करवाया है और जनप्रतिनिधियों से भी इस बारे में दखल करने का अनुरोध किया है। हालांकि इस बार भी बीते सालों की तरह किसानों को कृषि सत्र के दौरान सरकारी स्तर पर यूरिया और डीएपी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाए जाते रहने का आश्वासन मिला है लेकिन किसानों की आशंकाओं का अभी तक पूरी तरह से निराकरण नहीं हो पाया और वह अभी भी डीएपी और यूरिया की उपलब्धता को लेकर हड़बड़ी की स्थिति में है। किसानों की इसी चिंता को लेकर कोटा में कृषि विभाग को आशंका है कि निकट भविष्य में कोटा संभाग में यूरिया व डीएपी की कमी भांपकर किसान अभी से खाद का भंडारण कर सकते हैं जिससे खाद की कृत्रिम कमी उत्पन्न होने की आशंका है।
किसानों से अनावश्यक रूप से भंड़ारण नहीं करने का आग्रह
किसानों का यह सशंय नया नहीं है मगर इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को अनावश्यक रूप से भंड़ारण नहीं करने का आग्रह किया है व कहा है कि उर्वरक की कोई कमी नही है। साथ ही खाद्य विभाग ने इस बात की भी आशंका जताई है कि खाद विक्रेता किसानों को खाद के साथ अन्य उत्पाद भी बेच सकते हैं। इसके खिलाफ भी कृषि विभाग ने खाद विक्रेताओं को अन्य उत्पाद किसानों को जबरदस्ती नहीं बेचने के निर्देश दिए हैं और इस निर्देश की पालना नहीं करने पर कोटा जिले में इटावा के एक खाद विक्रेता का लाइसेंस 21 दिन के लिए निलम्बित कर दिया है।
डीएपी-यूरिया उर्वरकों की आपूर्ति सहकारी समितियों से
उप निदेशक (कृषि) खेमराज शर्मा ने बताया कि विभाग ने किसानों से अपील की है कि क्रय-विक्रय सहकारी समितियों,ग्राम सेवा सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा मेें डीएपी-यूरिया उर्वरकों की आपूर्ति की जा रही है। जरूरत के अनुसार ही उर्वरक क्रय करें,अनावश्यक रूप से अग्रिम भण्डारण नहीं करें क्योंकि क्षेत्र में मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ति कम्पनियां कर रही है। श्री शर्मा को उनसे मिले किसान संघ, जन प्रतिनिधियों एवं किसानों ने बताया कि उर्वरक विक्रेताओं द्वारा यूरिया एवं डीएपी के साथ सुपर फॉस्फेट-नेनो यूरिया या अन्य उत्पाद जबरदस्ती दिया जा रहा है जिससे किसानों पर अनावश्यक रूप से वित्तीय भार पड़ रहा है। इस पर श्री शर्मा ने कोटा जिले के सभी थोक एवं खुदरा विक्रेताओं को आगाह किया है कि डीएपी, यूरिया उर्वरक के साथ किसी भी प्रकार का अन्य उत्पाद का अटैचमेंट किसान की सहमति के बिना नहीं करें अन्यथा शिकायत प्राप्त होने पर कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। किसान समझाने के बाद भी सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक नहीं लेना चाहता है तो उसे अन्य अटैचमेंट लेने के लिये उर्वरक विक्रेता द्वारा बाध्य नहीं किया जा सकता।
सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक का उपयोग लाभकारी
हालांकि श्री शर्मा ने बताया कि जो किसान सरसों की बुवाई करने के लिए उर्वरक क्रय कर रहे हैं, उन किसानों को सिंगल सुपर फॉस्फेट उर्वरक का उपयोग लाभकारी रहेगा, इसमें फॉस्फेट के साथ-साथ कैल्शियम व सल्फर पौषक तत्व भी पाया जाता है जिससे सरसों के दाने में चमक व तेल की मात्रा बढ़ती है। इस बीच उप निदेशक (कृषि) ने शिकायत के आधार पर इटावा में उर्वरक विक्रेता मथुरालाल शिवनारायण फर्म की उनके द्वारा जांच की गई जिसमें किसानों को यूरिया एवं डीएपी के साथ अन्य उत्पाद अटैच कर जबरदस्ती दिया जाना पाया गया। श्री शर्मा ने बताया कि उर्वरक नियंत्रण अधिनियम की पालन नहीं करने पर रविवार को फर्म का लाइसेंस 21 दिवस के लिए निलम्बित किया गया है।

















