
-रवि जैन-
(रोड सेफ्टी एक्सपर्ट)
देश में एक ओर सड़कों का जाल बिछाने का काम बहुत तेजी से हो रहा है दूसरी ओर हादसों में भी बहुत तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2020 में 1 लाख 31 हजार 714 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई। दुखद पहलू यह है कि मृतकों में 62 फीसदी लोग 18 से 35 आयु वर्ग के थे। हाल ही उद्योगपति सायरस मिस्त्री की मौत के बाद देश भर में सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। लेकिन इसमें भी ब्लेम गेम चल रहा है। कोई कार की रफ्तार को सायरस मिस्त्री की मौत का कारण बता रहा है तो कोई सीट बेल्ट नहीं लगाने को।

लेकिन देश के अग्रणी सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, सड़क हादसों में पीडि़तों को दोष देना उचित नहीं है। इसके बजाय राजमार्ग सुरक्षा में सुधार की जरुरत है। सायरस मिस्त्री की मौत से भारत को सबक लेने की जरुरत है। इस हादसे ने भारत में दुनिया की सबसे खराब सड़कों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। वर्ष 2020 के हादसों के जो आंकड़े दिए गए हैं उनमें 69.3 प्रतिशत मौतें तेज रफ्तार के कारण हुई हैं। जबकि 30.1 प्रतिशत मौतें हेलमेट नहीं पहनने और 11.5 प्रतिशत मौते कार चलाते वक्त सीट बेल्ट नहीं लगाने से हुई हैं। इसी तरह कोटा में पिछले साल 56 लोगों की मौत हादसे में हुई। लेकिन सरकारी आंकड़े मौत तो बताते हैं लेकिन यह नहीं बताते कि इसमें खराब सड़कों या उनके त्रुटिपूर्ण डिजाइन का कितना योगदान है।
वास्तविक कारणों को खोजना जरुरी
दशकों से सड़क सुरक्षा पर गहनता से काम कर रहे ऑर्थोपेडिक सर्जन मैथ्यू वर्गीज का कहना है कि हमें सड़क दुर्घटना में पीडि़तों को दोष देने के बजाय हादसों के वास्तविक कारणों को खोजना चाहिए। यहां तक कि जल्दबाजी, लापरवाही और तेज गति से वाहन चलने वाले लोगों को भी बचाया जाना चाहिए। यह बचाव केवल आधुनिक तकनीक के जरिए ही किया जा सकता है। वर्गीज कहते हैं कि देश में वास्तविक समस्या असुरक्षित बुनियादी ढांचा है। इसी वजह से यहां दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। भारत में भले ही कारों की संख्या विकसित देशों की तुलना में बहुत कम हो लेकिन 2021 में भारतीय सड़कों पर 1.55 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
पुल की डिजाइन में दोष
वर्गीज ने कहा कि सायरस मिस्त्री की मौत की वजह सीट बेल्ट नहीं लगाना बताया जा रहा है। उनके साथ पिछली सीट पर बैठे एक अन्य व्यक्ति ने भी सीट बेल्ट नहीं लगाई हुई थी। वर्गीज ने कहा, इस दुर्घटना [साइरस मिस्त्री] में सीटबेल्ट पर जोर दिया गया है जबकि हादसे का वास्तविक कारण केवल सीट बेल्ट नहीं है। हमें इसी कारण को समझने की जरूरत है। जबकि प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र टाइम्स ऑफ इंडिया ने अज्ञात लोगों का हवाला देते हुए बताया कि एक फोरेंसिक टीम ने पुल के डिजाइन को दोषपूर्ण पाया, जिसकी वजह कार दुर्घटनाग्रस्त हुई। हालांकि अभी इस निष्कर्ष को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सभी की सुरक्षा की जानी चाहिए
वर्गीज का कहना है कि सड़क सुरक्षा एक सामान्य विज्ञान नहीं है। यह तथ्यों पर आधारित विज्ञान है। उनका कहना है कि नीति निर्माताओं को वास्तविक स्थिति समझ में नहीं आती। सड़कों के निर्माण की खामियों की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं। लेकिन इन त्रुटियों के कारण किसी की मौत नहीं होनी चाहिए। वर्गीज ने कहा कि सड़क पर, वाहन के अंदर या वाहन के बाहर सभी की सुरक्षा की जानी चाहिए। यह प्लानिंग करने वालों की जिम्मेदारी है कि सड़क पर हादसों से लोगों की सुरक्षा कैसे की जाए। कहा जाता है कि लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति शिक्षित किया जाए लेकिन वास्तविकता यह है कि विकसित देशों में शिक्षा के बावजूद सड़क हादसों में कमी नहीं हुई है।
उनका कहना है कि सड़क के बुनियादी ढांचे को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि हादसे नहीं हों। क्योंकि भारत में तो सड़क पर एक छोटी सी गलती आपको गंभीर रूप से घायल या मौत की ओर धकेल सकती है।
चेन्नई में सर्वाधिक दुर्घटनाएं
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, विश्लेषण किए गए 50 से अधिक महानगरों में चेन्नई एकमात्र शहर था जिसने पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में 5,000 का आंकड़ा पार किया था। इस महानगर में 2021 में करीब 1,000 लोगों की जान चली गई और 5,000 से अधिक घायल हो गए। तमिलनाडु प्रति व्यक्ति मृत्यु के मामले में पहले स्थान पर रहा। अधिकारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि दुर्घटनाओं के लिए डिजाइन की खामियां जिम्मेदार हैं, जबकि जनशक्ति की कमी ने सड़क सुरक्षा नियमों के कार्यान्वयन में बाधा उत्पन्न की है। उन्होंने इस दिशा में एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है। पिछले साल चेन्नई में सड़क हादसों में 999 लोगों की जान चली गई थी। उनमें से आधे की मृत्यु 45 वर्ष की आयु से पहले हो गई। उनमें से 80 प्रतिशत से अधिक पुरुष थे। पांच में से एक दुर्घटना देर शाम छह बजे की है।


















सड़क दुर्घटना पर तथ्यों के साथ सटीक विश्लेषण, कोटा में भी कुछ पुल, फ्लाई ओवर और अंडरपास की डिज़ाइन भी दुर्घटना का कारण बनेगी।
Jdb और अंटाघर के यहां बनाया सर्किल पर तो सुरक्षित निकासी तथा सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। वाहन चालक तो चकरघिनी हो जाता है। यहां 1-2 मोतें भी हो चुकी हैं।
इनके लिए भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए
सड़क दुर्घटना पर तथ्यों के साथ सटीक विश्लेषण, कोटा में भी कुछ पुल, फ्लाई ओवर और अंडरपास की डिज़ाइन भी दुर्घटना का कारण बनेगी।
Jdb और अंटाघर के यहां बनाया सर्किल पर तो सुरक्षित निकासी तथा सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। वाहन चालक तो चकरघिनी हो जाता है। यहां 1-2 मोतें भी हो चुकी हैं।
इनके लिए भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के पीछे हाईवे सड़कों की खस्ता हालत,रांग साइड में फर्राटे मारते वाहन, पशुओं का जमावड़ा और दो पहिया वाहन चालकों की अनियंत्रित ड्राइविंग से असमय लाखों मौतें हो रही हैं। कोटा शहर का दादाबाड़ी_केशवपुरा फ्लाई ओवर सर्प की भांति टेढ़ा है इसके उतार में ,वहां की स्थति का ध्यान नहीं रखा गया है, इसलिए बाद में स्पीड ब्रेकर बनाने पड़े हैं। शहर के विकास में भाई भतीजावाद को दर किनार करके सुरक्षित सड़कें, फ्लाई ओवर बनाए जाने चाहिए।