पधारने लगे विदेशी पावणे

हमारे जलाशयों में पक्षियों की सबसे अधिक संख्या जनवरी फरवरी में होती है। इसके पीछे कई कारण हैं एक तो जलाशयों में पानी कम हो जाता है जिससे पक्षियों को भोजन आसानी से उपलभ्ध हो जाता है। दूसरा छोटे जलाशयों से खेती के काम में पानी का इस्तेमाल होता है इसलिए यह पानी समाप्त हो जाने पर वहां से पक्षी पलायन कर यहां आ जाते हैं

-एएच जैदी-

ए एच जैदी

(नेचर प्रमोटर)
कोटा। हाडोती के जलाशयों में भरपूर पानी और भोजन तथा साइबेरिया समेत यूरोपीय देशों में बर्फबारी से अप्रवासी पक्षियों ने यहां डेरा डालना शुरू कर दिया है। सर्दी बढने के साथ हाड़ोती के जलाशयों में और आसपास अप्रवासि पक्षियों की संख्या बढ़ने लगी है। यहां के जलाशयों में भरपूर पानी होने से इन मेहमान पक्षियों की मौज है।

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फोटो ए एच जैदी

इस समय उत्तरी भारत मे भी बर्फ बारी हो रही है इसलिए मंगोलिया, साइबेरिया, रशिया यूरोप, अफ्रीका से भारत की ओर आने वाले पक्षी राजस्थान में ठिकाने तलाश चुके हैं। इन पक्षियों के लिए राजस्थान विशेषकर कोटा संभाग का मौसम बहुत मुफीद रहता है। कोटा में उम्मेदगंज तथा आलनिया इन विदेशी पक्षियों विशेष आश्रय स्थल है। इनके अलावा गिरधरपुरा, सावन भादो, किशोर सागर, दरा, बोराबास, लखावा, रानपुर, सिमलिया, राजपुरा, बाणदाहेड़ा, चारचोमा में भी इन पक्षियों की अठखेलियां देखने को मिलती हैं।

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फोटो ए एच जैदी

इस समय रिवर टर्न, केसबर टर्न, सी गल, नॉर्दन शवलर, गार्गेनिटील, पिनटेल, बारहेडेड गीस, गरेलेक गीस, कॉमन कूट,पेलिकन्स, रूडी शेल्डक आदि दिखाई देने लगे हैं। फिलहाल संख्या कम है। हमारे जलाशयों में पक्षियों की सबसे अधिक संख्या जनवरी फरवरी में होती है। इसके पीछे कई कारण हैं एक तो जलाशयों में पानी कम हो जाता है जिससे पक्षियों को भोजन आसानी से उपलभ्ध हो जाता है। दूसरा छोटे जलाशयों से खेती के काम में पानी का इस्तेमाल होता है इसलिए यह पानी समाप्त हो जाने पर वहां से पक्षी पलायन कर यहां आ जाते हैं।

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