कांग्रेस में ओबीसी नेतृत्व: ताकत या चुनौती?

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photo courtesy social media
वर्तमान स्थिति यह है कि जो ओबीसी नेता राहुल गांधी के साथ बैठे हैं, वे अपने-अपने राज्यों में कांग्रेस की सत्ता को बरकरार नहीं रख पाए। इसके बावजूद वे ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में बड़े पदों पर आसीन हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यही नेता कांग्रेस को मजबूत कर पाएंगे और सत्ता में वापसी दिला पाएंगे, यह निर्णय पाठकों पर छोड़ा जा सकता है।

बैठक में दिखी मजबूत मौजूदगी, लेकिन सवाल कायम

– देवेंद्र यादव-

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देवेन्द्र यादव

नई दिल्ली में बुधवार, 22 अप्रैल को कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा गांधी भवन में कांग्रेस के ओबीसी विभाग की एडवाइजरी काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी के साथ बैठे ओबीसी वर्ग के कांग्रेस नेताओं को देखकर यह सवाल उठता है कि कांग्रेस के भीतर ओबीसी वर्ग के इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद पार्टी राज्यों में विधानसभा चुनाव क्यों नहीं जीत पा रही है?

अनुभवी नेतृत्व के बावजूद चुनावी कमजोरी

बैठक में इंदिरा गांधी युग के नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी मौजूद थे, जो तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं और हर बार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। इसके बावजूद सवाल उठता है कि इतने अनुभवी ओबीसी नेता की मौजूदगी के बाद भी कांग्रेस, गहलोत के राज्य राजस्थान में लगातार चुनाव क्यों नहीं जीत पा रही है?

2018 की जीत से 2023 की हार तक का सफर

2014 में केंद्र में कांग्रेस की सत्ता जाने के बाद राहुल गांधी ने पार्टी की कमान संभाली और राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनके नेतृत्व में 2018 में कांग्रेस ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाई। राजस्थान में अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल और मध्य प्रदेश में कमलनाथ मुख्यमंत्री बने।

हालांकि, एक वर्ष बाद ही मध्य प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में विधायकों की बगावत के कारण कमलनाथ सरकार गिर गई। राजस्थान में पूर्ण बहुमत न होने के बावजूद सरकार बनी रही, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में तीनों राज्यों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा ने वापसी की।

आंतरिक कलह और नेतृत्व संकट

राजस्थान में सत्ता से लेकर संगठन तक ओबीसी नेताओं का वर्चस्व था। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे नेता मौजूद थे। इसके बावजूद कांग्रेस अपनी सत्ता नहीं बचा पाई। लगभग यही स्थिति छत्तीसगढ़ में भी रही, जहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार नहीं बचा सके।

इस पर सवाल उठता है कि क्या ये नेता राहुल गांधी के साथ बैठकर सलाह देते समय आत्ममंथन करते हैं? 2018 में मिली बड़ी जीत के बावजूद ये नेता अपने-अपने राज्यों में सत्ता को संभाल नहीं पाए। मध्य प्रदेश में सरकार एक साल में गिर गई, जबकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 2023 में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। इन राज्यों में मुख्यमंत्री पद को लेकर आंतरिक विवाद भी हार का एक बड़ा कारण रहा।

ओबीसी राजनीति में रणनीतिक बदलाव की जरूरत

राहुल गांधी को यह समझना होगा कि कांग्रेस में ओबीसी के बड़े नेताओं की मौजूदगी के बावजूद पार्टी इस वर्ग में कमजोर क्यों है। उन्हें बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से ओबीसी वर्ग के नए और प्रभावशाली नेताओं को आगे लाना होगा। साथ ही, केवल बड़ी जातियों पर ध्यान देने के बजाय ओबीसी की छोटी-छोटी जातियों को भी संगठन में प्रतिनिधित्व देना होगा। पंचायत, निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में इन वर्गों को अधिक अवसर देना जरूरी है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह लेखक के निजी विचार हैं)

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