
-एमक्यूएम ले सकता है शहबाज शरीफ सरकार से समर्थन वापस
-द ओपिनियन-
पाकिस्तान में आर्थिक हालात बेकाबू होने के साथ साथ राजनीतिक अस्थिरता का खतरा भी बढ़ रहा है। पाकिस्तान कर्ज में डूबा है और कर्ज के लिए इस्लामी देशों के समक्ष गिड़गिड़ा रहा है। लोग महंगाई की मार से बेहाल है।आटे के भाव आसमान छू रहे हैं। इस बीच राजनीतिक हलकों में यह खबर चर्चा का विषय बनी हुई है कि एमक्यूएम शाहबाज सरकार से समर्थन वापस ले सकती है। इस पर विचार के लिए एमक्यूएम ने पार्टी नेताओं की एक बैठक बुलाई है। अब यदि एमक्यूएम समर्थन वापसी का फैसला करती है तो शहबाज की सरकार गिर सकती है और वहां राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने का खतरा पैदा हो सकता है। एमक्यूएम का कोई भी फैसला रविवार सुबह तक आने की अटकलें हैं। खबर है कि पीएम शहबाज शरीफ ने किसी भी राजनीतिक संकट को टालने के लिए एमक्यूएम नेता खालिद मकबूल सिद्दीकी से संपर्क किया। शरीफ सिद्दीकी से गठबंधन सरकार छोड़ने के अपनी पार्टी के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है।

मीडिया में आई खबरों में कहा गया है कि एमक्यूएम सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष को अपना इस्तीफे सौंप दिए हैं। यदि बात आगे बढ़ी और समर्थन वापस लिया गया तो फिर पाकिस्तान में चुनाव के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। यदि शहबाज सरकार गिरी तो फिर पाकिस्तान के पास चुनाव कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। इससे पहले बिगड़ती आर्थिक स्थिति और फौज के साथ टकराव के चलते इमरान खान को पद छोड़ना पड़ा और तब शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बने लेकिन उनकी सरकार भी पाकिस्तान को आर्थिक संकट से बाहर नही निकाल सकी। चीनी कर्जे श्रीलंका को ही नहीं पाकिस्तान को भी दुख दे रहे हैं लेकिन भारत विरोध में अंधे पाकिस्तान को यह सच्चाई दिखाई नहीं देती। इसी अंध विरोध के चलते पाकिस्तान भारत के साथ सहज व्यापारिक रिश्ते नहीं बना पाया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि शहबाज सरकार गिरी तो पाकिस्तान में अप्रैल से जुलाई के बीच में आम चुनाव हो सकते हैं। खबर है कि पूर्व पीएम नवाज शरीफ ने अपने भाई और पीएम शहबाज शरीफ से फोन पर बात की है और उन्हें जल्दी चुनाव कराने का मशविरा दिया है।
उधर, पीटीआई प्रमुख और पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने पंजाब एसेंबली भंग कर दिया है। इमरान खान चाहते हैं कि पाकिस्तान मे जल्द से जल्द चुनाव हों। इमरान लगातार पाकिस्तानी सेना पर निशाना साधते रहे हैं जब से उनकी सरकार गई है, सेना के साथ उनके रिश्ते और खराब हुए है।

















