-अखिलेश कुमार-

(फोटो जर्नलिस्ट)
कोटा। इस बार अच्छी बारिश होने से कोटा समेत हाडोती के अधिकांश तालाब, ताल और तलैया में पानी की अच्छी आवक हुई है। यही वजह है कि पक्षियों को यहां भोजन, पानी और आवास की सुविधा मिल रही है। सभी आद्र इलाकों में इस बार पक्षियों को चहकते देखा जा सकता है। आप कहीं भी पहंुच जाएं पक्षियों की अठखेलियां मन मोह लेंगी। इनमें न केवल स्थानीय बल्कि बाहर से भी पक्षी आए हैं। नांता का जवाहर सागर तालाब भी इस समय पक्षियों के कलरव से गंुजायमान है। सुबह के वक्त तो यहां का माहौल देखते ही बनता है क्योंकि उस समय वाहनों तथा अन्य मानवीय गतिविधियों का शोर नहीं होता। केवल पक्षियों का कलरव ही सुनाई देता है। यहां तक कि यदि आप तडके जाएं तो मंद हवा की सरसराहट भी सुन और महसूस कर सकते हैं।




















अखिलेश जी ने जो बात कही है उस से मैं सहमत नही हूं।
जो पक्षी टापू पर बैठे दिख रहे हैं वो स्थानीय पक्षी हैं जिस में जानघिल (Painted stork) हैं या फिर
पनकौवे (Cormorant) हैं। इन में स्थानीय व माइग्रेट्री ducks नही हैं । इस वर्ष जलाशयों में प्रवासी और बहुत से
स्थानीय पक्षी भी अभी तक नही आए हैं।
कल रविवार को कनवास के किशोर सागर के किनारे वॉच टावर का समर्पण श्री भरत सिंह विधायक सांगोद द्वारा किया गया है। वहां मेरे जो मित्र गए थे उन्होंने बताया कि पूरा तालाब खाली था और उस में एक भी पक्षी नही था। कुछ दिन पहले मैं स्वयं गामछ गांव के पास चंबल पर गया था वहां भी पक्षियों की
संख्या नगण्य थी। पक्षियों की घटती संख्या से सभी पक्षी प्रेमी निराश और चितित हैं।